
रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों के साथ बुधवार को श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान में हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्ति प्रक्रियाओं में गड़बड़ी को लेकर स्पष्ट तौर पर कहा कि इस मामले में कोई भी दोषी हो, कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बचेगा नहीं।



उन्होंने इतना तक कहा कि जांच एजेंसी को पूरी छूट दी गई है कि इस प्रकरण में किसी को भी छोड़ा न जाए। अगर उनके घर में भी कोई शामिल है, तो एजेंसी उसपर कार्रवाई करे। इसकी जानकारी देते हुए कांग्रेस कोटे से मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि मुख्यमंत्री की बातों का विधायकों ने एकमत होकर स्वागत किया। बैठक में सत्ताधारी गठबंधन के सभी मंत्री और विधायक मौजूद थे। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष विशेष तौर पर बैठक में पहुंचे थे।
इससे पहले कांग्रेस के सभी विधायक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां उनकी जेपीएससी मामले पर मुख्यमंत्री के साथ बात हुई। बाद में सभी उनके साथ श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान पहुंचे। विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री ने मानसून सत्र के सफल, सार्थक और सुचारू संचालन को लेकर चर्चा की।
बैठक से निकलने के बाद कांग्रेस विधायक अनूप सिंह और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक से संबंधित जानकारी साझा की और कहा कि सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों का खुलकर जवाब देगी। इस दौरान भाजपा के शासनकाल में हुई गड़बड़ियों को लेकर सत्तापक्ष को आक्रामक रुख अपनाने की बातें हुई।
विधायकों को पूरी तैयारी के साथ सदन मं पहुंचने के लिए कहा गया। कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने बताया कि छात्रवृत्ति की राशि देने में केंद्र सरकार की ओर से की जा रही अनदेखी का मुद्दा भी सत्ताधारी गठबंधन के विधायक उठाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सरकार की रणनीति स्पष्ट रूप से यह है कि जनहित के मुद्दाें पर सरकार विपक्ष को राजनीति करने का मौका नहीं देगी। छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा।
सत्तापक्ष इस सत्र में विपक्ष को हावी होने का मौका नहीं देगा। सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हमलावर होने पर सत्ता पक्ष भाजपा के कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों का उठाएगा। विपक्ष के सवालों का उसी अंदाज में जवाब दिया जाएगा।सदन के भीतर विपक्ष द्वारा छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के उठाए जाने वाले मुद्दों पर केवल बचाव की मुद्रा में रहने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया जाएगा।

