
रांची। झारखंड के पूर्व सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में पद्म अवॉर्ड्स दिए। पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 25 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की गई थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को यह ‘पद्म भूषण’ सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान और झारखंड राज्य के गठन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका के लिए दिया गया है। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से पहचान बनाने वाले शिबू सोरेन ने आदिवासी समाज के अधिकारों और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया था। उनके संघर्ष को चलते और बने सियासी घटनाक्रम के चलते बिहार से अलग हो कर झारखंड बन गया था।



शिबू सोरेन ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1977 में लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन शिबू सोरेन ने हार नहीं मानी। जमीनी स्तर पर काम में जुटे रहे और फिर 1980 में दुमका से लोकसभा चुनाव लड़कर पहली जीत दर्ज की। इसके बाद शिबू सोरेन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
शिबू कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे। वे झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने और केंद्र की मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। राजनीतिक जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद वे हमेशा आदिवासी समाज, जल-जंगल-जमीन और झारखंड के हितों के लिए मजबूती से खड़े रहे।
131 हस्तियों को पद्म पुरस्कार : गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले यानी 25 जनवरी को 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की थी। इस क्रम में पहले चरण में देश की 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया। जबकि, शेष विजेताओं को दूसरे चरण में अवॉर्ड दिए जाएंगे।

