
नयी दिल्ली। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को देखते हुए देश में प्राकृतिक गैसों की आपूर्ति पर एस्मा लगा दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी प्राकृतिक गैस (आपूर्ति नियमन) आदेश, 2026 में घरेलू उपभोग और दूसरे उपयोगों के लिए गैस की आपूर्ति की सीमा तय कर दी गई है।इस संबंध में जारी गजट अधिसूचना में कहा गया है कि ‘पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष’ के मद्देनजर ‘वितरण में समानता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से’ यह आदेश जारी किया गया है। वहीं, बेंगलुरु के बाद अब हरियाणा में कॉमर्शियल गैस की आपूर्ती रोक दी गई है।गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, इन क्षेत्रों की जरूरतें पहले पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। संशोधित व्यवस्था के तहत पाइप के जरिये घरेलू रसोई गैस (पीएनजी), वाहनों के लिए संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता श्रेणी में सबसे ऊपर रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70 प्रतिशत पूरा किया जाएगा। इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाएगा।क्या है एस्मा?एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) वर्ष 1968 में आया जिसे 1981 में संशोधित किया गया। इस कानून में अनिवार्य वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित रखने के लिए आवश्यक कार्रवाईयां करने के प्रावधान किए गए हैं। यह कानून हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्टेशन और सैनिटेशन जैसे जरूरी क्षेत्रों में हड़ताल पर रोक लगाकर जरूरी सेवाओं की बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए बनाया गया था। यह सरकार को हड़ताल पर रोक लगाने की इजाजत देता है, और इसे तोड़ने पर जुमार्ना या जेल हो सकती है।




