
पटना। लोकसभा चुनाव 2024 में NDA को काराकाट, बक्सर, आरा और औरंगाबाद में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। NDA को ये समझ में आ गया था कि चूक कहां हुई है। अब बीजेपी और जदयू की तरफ से जारी उम्मीदवारों की लिस्ट से इतना साफ लग रहा है कि उसके फोकस पर कौन से वोटर हैं। बीजेपी और JDU ने अपने-अपने कोटे से 14 ऐसे उम्मीदवारों को तरजीह दी है, जो एक ही जाति के हैं। मकसद साफ है, इन वोटरों को गोलबंद कर अपने पाले में लाना, जिनके चलते लोकसभा चुनाव 2024 में नुकसान हुआ।



भाजपा और जदयू ने अपने-अपने कोटे से सात-सात कुशवाहा उम्मीदवार उतारे हैं । 2024 के लोकसभा चुनावों में, कुशवाहा मतदाताओं की एक बड़ी जमात ने महागठबंधन को वोट किया था। इससे दक्षिण बिहार की लोकसभा सीटों के एक बड़े हिस्से में एनडीए खेमे को भारी नुकसान हुआ। NDA को समझ में आते देर नहीं लगी कि उसके कुशवाहा वोट बैंक में लालू यादव ने सेंध लगा दी। इसी के चलते एनडीए को आरा, काराकाट, बक्सर और औरंगाबाद में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में अब इन वोटरों को फिर से पाले में लाने की कोशिश की जा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA कुशवाहा वोटरों में सेंधमारी से बचने के लिए सक्रिय हो चुका है।
एनडीए खेमे में बड़ी संख्या में कुशवाहा उम्मीदवारों का चयन इस विधानसभा चुनाव में कुशवाहा वोटरों को अपने पक्ष में बनाए रखने की एनडीए की नई कोशिश को साफ दिखा रहा है। भाजपा के कुशवाहा चेहरे और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तारापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने का टिकट दिया गया है।
जेडीयू ने मीनापुर से अजय कुशवाहा, जीरादेई से भीष्म कुशवाहा, महनार से उमेश सिंह कुशवाहा, विभूतिपुर से रविना कुशवाहा और जगदीशपुर से भगवान सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है। कुशवाहों के अलावा, जेडीयू ने धानुक जाति से भी अच्छी संख्या में उम्मीदवारों का चयन किया है, जिनकी मुंगेर, भागलपुर, मधुबनी, सुपौल और दरभंगा जैसे क्षेत्रों में काफी उपस्थिति है। महिलाओं और अति पिछड़ी जातियों के मतदाताओं के अलावा, जेडीयू ने लव-कुश (कुर्मी और कुशवाहा, जिन्हें बिहार में एक राजनीतिक गठजोड़ कहा जाता है) को अपने पक्ष में बनाए रखने पर हमेशा विशेष ध्यान दिया है। जेडीयू की पहली लिस्ट में ही साफ दिख गया कि इस गठजोड़ को भी अपनी हिस्सेदारी दी गई है।

