
नयी दिल्ली । लोकसभा में सरकार ने दूरगामी परिणामों वाले एक संविधान संशोधन को पेश करने का प्रस्ताव रखा जिसमें प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराध के आरोपों में पद से हटाने का प्रावधान है किंतु इस पर विपक्ष के विरोध और भारी हंगामे के कारण सदन की बैठक करीब 45 मिनट के लिए अपराह्न तीन बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बार कार्यवाही 3 बजे शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहा। इस कारण कार्यवाही एक बार फिर 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।



सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दो बजे शुरू हुई तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025′, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025′ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025′ पेश किए जाने का प्रस्ताव रखा।
विपक्ष की ओर से एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के मनीष तिवारी और केसी वेणुगोपाल, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने विधेयकों को पेश किए जाने का विरोध किया।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार सात दिन पहले विधेयक पेश करने का नोटिस सदस्यों को नहीं दिया गया और इसकी प्रतियां भी समय पर नहीं वितरित की गईं। जब प्रेमचंद्रन ने कहा कि तीनों विधेयकों को सदन में पेश करने की सरकार को इतनी हड़बड़ी क्यों है? इस पर गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्रेमचंद्रन जल्दबाजी की बात कर रहे हैं, लेकिन ‘‘इसका सवाल इसलिए नहीं उठता क्योंकि मैं इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति को सौंपने का अनुरोध करने वाला हूं। संयुक्त समिति जो लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों, पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की बनेगी और इस पर विचार करके विधेयक को आपके सामने लाएगी।”

