
इटखोरी (चतरा)। जमीन की हवस ऐसी की बुझती ही नहीं ताजा मामला ग्राम कनौदी पंचायत धनखेरी का है जहां लगभग चालीस वर्ष से संचालित सरकारी विद्यालय को जमींदोज कर दिया गया है।




धनखेरी पंचायत की मुखिया रीना देवी ने प्रखंड के उपप्रमुख संजय गुप्ता एवं उनके सहयोगियों पर इस कार्य का ठीकरा फोड़ते हुए स्थानीय थाने को एक आवेदन दिया है जिसमे कहा गया है कि यह कार्य सुनियोजित तरीके से किया गया है जिसमे जमीन को अपने कब्जे मे करने की मंशा थी किन्तु मेरे एवं मेरे पति के विरोध ने इनकी मंशा पर पानी फेर दिया और अब ये हमारे पति के पीछे हाथ धो कर पड़े है।
इस घटनाक्रम पर जब उपप्रमुख का बयान हमने लेना चाहा तो उनका फोन तो नहीं लगा किन्तु प्रखंड के जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि भरत साव जो बात करते वक़्त उक्त घटित स्थल पर मौजूद थे ग्रामवासियों संग इस मुद्दे पर चर्चा भी कर रहे थे उनका कहना है कि जर्जर भवन था जो कभी भी किसी घटना को निमंत्रण दे सकता था इसलिए कुछ लोगों ने इसे गिराने का फैसला लिया।
उन्होंने बताया कि पूर्व मे संबंधित विभाग को भी पत्र दिया गया था किन्तु उस पत्र के जवाब मे कोई उत्तर उन्हें प्राप्त नहीं था । अब प्रश्न यह है कि क्या विभाग ने जवाब नहीं दिया तो इस तरह के निर्णय स्वयं से लिए जा सकता है? तब तो बिना संबंधित विभाग के जानकारी हर उस पेड़ को भी यह कह कर काट दिया जा सकता है कि यह पेड़ कभी भी गीर सकता है और दुर्घटना को निमंत्रण दे रहा था, यह कितना उचित अथवा अनुचित है निर्णय भगवान भरोसे चुकि यंहा हर निर्णय अब पदाधिकारी के पास कितना परिचय इस बात पर निर्भर करने लगा है, गलत या सही इसपर नहीं।

