
बिक्रमगंज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय बिहार दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को रोहतास जिले के बिक्रमगंज पहुंचे। उन्होंने 48,520 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया। बिहार में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सड़क अवसंरचना और संपर्क को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास किया. इसमें वाराणसी-रांची-कोलकाता (एनएच-319बी) नेशनल हाईवे भी शामिल है, जो झारखंड की राजधानी रांची को वाराणसी से जोड़ेगी. यह नेशनल हाईवे यूपी के वाराणसी से शुरू होगा, जो बिहार के चार और झारखंड के पांच जिलों को कवर करते हुए पश्चिम बंगाल के चार जिलों में प्रवेश करेगा. इसके बाद नेशनल हाईवे-19 से मिल जायेगा।



वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड सिक्सलेन एक्सप्रेस वे झारखंड के पांच जिलों से होकर गुजरेगा। इनमें चतरा, हजीराबाग, रामगढ़, पीटरबार और बोकारो शामिल हैं। एक्सप्रेस वे चंदौली स्थित बरहुली गांव से होकर बिहार में प्रवेश करने के बाद कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिले से होते हुए झारखंड में प्रवेश करेगा. फिर, बोकारो से होते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगा. यहां एक्सप्रेस वे बंगाल के पुरुलिया, बांकुरा और आरामबाग से होकर उलुबेरिया में राष्ट्रीय राजमार्ग 19 में मिल जायेगा. वर्तमान में कोलकाता से वाराणसी की दूरी लगभग 690 किमी है, जिसकी दूरी तय करने में करीब 12 से 13 घंटे समय लगता है। लेकिन नया एक्सप्रेस वे खुलने से यह सफर महज 6 से 7 घंटे में पूरा हो जायेगा
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत 35000 करोड़ से इस परियोजना कार्य का विकास होगा। इस 6 लेन वाराणासी-रांची-कोलकाता एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश ,बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड को एक सड़क के जरिये जोड़ने के लिए किया जा रहा है। इससे व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देंगी. इस प्रोजेक्ट से न केवल रोड कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
बताया गया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेस वे परियोजना का 22 किमी का हिस्सा यूपी, 159 किमी हिस्सा बिहार, 187 किमी हिस्सा झारखंड और सबसे ज्यादा 242 किमी लंबाई का हिस्सा पश्चिम बंगाल में होगा. इसके लिए कुल 10, 000 करोड़ रुपये खर्च कर जमीन अधिग्रहण किये जाने का अनुमान है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ होने की संभावना है.
35000 करोड़ रुपये से होगा निर्माण : इधर, वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए 35000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है. इसके पहले पैकेज में 994.3 करोड़ रुपये की लागत से 27 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया जायेगा. जबकि, दूसरे पैकैज में भी 27 किमी सड़क का ही निर्माण होगा, जिसके निर्माण में 851 करोड़ रुपये की लागत आयेगी।
औरंगाबाद को सुपर थर्मल पावर का तोहफा : प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बिजली के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए औरंगाबाद जिले में 29,930 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली नबीनगर सुपर थर्मल पावर परियोजना, चरण-कक (3७800 मेगावाट) की आधारशिला रखी। इस योजना का उद्देश्य बिहार और पूर्वी भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बताया जा रहा है कि इससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में सस्ती बिजली उपलब्ध होगी।
रोहतास को पटना-आरा-सासाराम को ग्रीनफील्ड फोरलेन रोड : इस क्रम में पीएम मोदी ने क्षेत्र में सड़क अवसंरचना और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए एनएच-119ए के पटना-आरा-सासाराम खंड को चार लेन का बनाने, छह लेन का बनाने और बक्सर और भरौली के बीच एक नए गंगा पुल के निर्माण सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
इन परियोजनाओं से राज्य में निर्बाध हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण होगा और साथ ही व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने करीब 5,520 करोड़ रुपये लागत वाले एनएच-22 के पटना-गया-डोभी खंड के चार लेन के निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। इसके अलावा एनएच-27 पर गोपालगंज शहर में एलिवेटेड हाईवे के चार लेन के निर्माण और ग्रेड सुधार का भी उद्घाटन किया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में रेल अवसंरचना में सुधार लाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप अन्य परियोजनाओं के अलावा 1,330 करोड़ रुपये की लागत वाली सोन नगर-मोहम्मदगंज के बीच तीसरी रेल लाइन राष्ट्र को समर्पित की। इसके अलावा भी कई परियोजनाओं की सौगात पीएम मोदी ने बिहार को दी। इस मौके पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई केंद्रीय मंत्री और बिहार के मंत्री उपस्थित थे।

