
नई दिल्ली। भारत को आज नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद, न्यायमूर्ति बृजेश रंगनाथ गवई (बी.आर. गवई) ने देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामय समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। महाराष्ट्र के अमरावती में जन्मे जस्टिस गवई ने फ्रीजरपुरा स्लम के नगरपालिका स्कूल में 7वीं तक पढ़ाई की। फिर मुंबई और नागपुर में पढ़े। अमरावती के कॉलेज से बीकॉम और एलएलबी की। 1985 में नागपुर में बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच में वकालत शुरू की। 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट के एडिशनल जज बने और 2005 में स्थायी नियुक्ति मिली। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट जज बने। इनके पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई लोकसभा सांसद रहे हैं। 2006 से 2011 के बीच बिहार, सिक्किम और केरल के राज्यपाल भी रहे हैं।



जस्टिस भूषण गवई की मां ने कड़ी मेहनत एवं दृढ़ संकल्प को अपने बेटे की सफलता का मूल आधार बताते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करके इसे अर्जित किया है। चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस गवई ने हिंदी में शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, एस. जयशंकर, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आदि इस समारोह में उपस्थित थे। साथ ही पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस गवई के परिवार के सदस्य भी वहां मौजूद थे। शपथ ग्रहण के बाद चीफ जस्टिस गवई ने सभी उपस्थित लोगों का बारी बारी से अभिवादन किया और इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद अपनी मां के पैर छुए।
जस्टिस भूषण गवई की मां कमलताई गवई ने पत्रकारों से बातचीत में भरोसा जताया कि उनका बेटा अपने नए पद के साथ पूरा न्याय करेगा। मूलरूप से महाराष्ट्र के अमरावती जिला निवासी जस्टिस गवई के पिता दिवंगत आर. एस गवई बिहार, केरल और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं और वह ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया’ के नेता भी थे। 52 वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेने वाले चीफ जस्टिस गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा और वह 23 दिसंबर 2025 को रिटायर हो जाएंगे। चीफ जस्टिस गवई ने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की थी और नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक वे बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त पब्लिक प्रोसिक्युटर रहे। 17 जनवरी 2000 को उन्हें नागपुर बेंच के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।

