Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest Poli news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    झारखंड चेंबर और चीन बढाएंगे निवेश और व्यापार में सहयोग

    March 31, 2026

    रांची के कई इलाकों में कल छह घंटे तक नहीं रहेगी बिजली

    March 31, 2026

    गन्नाथपुर मंदिर में 11 जोडे बंधे परिणय सूत्र में

    March 31, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • झारखंड चेंबर और चीन बढाएंगे निवेश और व्यापार में सहयोग
    • रांची के कई इलाकों में कल छह घंटे तक नहीं रहेगी बिजली
    • गन्नाथपुर मंदिर में 11 जोडे बंधे परिणय सूत्र में
    • मेयर रोशनी खलखो की मां का निधन
    • श्रीनिवास लुइस को रिमांड पर लेगी रांची पुलिस, झारखंड के कई अदालतों को उड़ाने की दी थी धमकी
    • अविश्वास खत्म होने पर वैवाहिक संबंध असंभव, हाई कोर्ट ने जमशेदपुर फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश निरस्त किया
    • खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में झारखंड के शिव कुमार सोरेन और पृथ्वी उरांव सबसे तेज धावक
    • बिहार में एसडीपीओ के पास 25 भूखंड और डीआरडीए निदेशक निकला धनकुबेर,किशनगंज और सहरसा में इओयू का छापा
    Facebook X (Twitter) Instagram
    News Maati
    • Home
    • Jharkhand
      • Bokaro
      • Chatra
      • Deoghar
      • Dhanbad
      • Dumka
      • East Singhbhum
      • Garhwa
      • Giridih
      • Godda
      • Gumla
        • Hazaribagh
        • Jamtara
        • Khunti
        • Koderma
        • Latehar
        • Lohardaga
        • Pakur
        • Palamu
        • Ramgarh
        • Ranchi
        • Sahibganj
        • Saraikela Kharsawan
    • Bihar
    • Delhi
    • Opinion
    • Sports
    • About Us
      • Privacy Policy
      • Terms and Conditions
      • Contact Us
    News Maati
    Home » भगवा ध्वज को अपना गुरु क्यों मानता है RSS, यहां पढ़ें पूरी खबर
    India

    भगवा ध्वज को अपना गुरु क्यों मानता है RSS, यहां पढ़ें पूरी खबर

    News MaatiBy News MaatiApril 16, 2025No Comments6 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली । आजादी से पहले की बात है, जब तिरंगा लगाने का निर्णय हुआ, तो उस समय तिरंगे पर अशोक चक्र नहीं, बल्कि चरखे का चिह्न था। कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में पहली बार इसे फहराया गया। ध्वज स्तंभ 80 फीट ऊंचा था। जवाहरलाल नेहरू अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे थे। ध्वज बीच में फंस गया। अब किसी की हिम्मत नहीं थी कि इतनी ऊंचाई पर चढ़कर उसे ठीक कर सके। अचानक भीड़ में से एक युवक आगे आया। वह दौड़कर आगे बढ़ा, खंभे पर चढ़ा, गांठें खोलीं और झंडे को ऊंचा उठाकर नीचे उतरा। नेहरू ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा कि शाम को खुले अधिवेशन में अभिनंदन के लिए आना। तब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जाकर कहा कि इस युवक को मत बुलाओ, क्योंकि यह शाखा में जाता है। ऐसा करने वाले स्वयंसेवक जलगांव निवासी किशन सिंह राजपूत थे। वेडनेसडे बिग टिकट में आज कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के भगवा ध्वज की।

    विश्व संवाद केंद्र के वीएसके चित्तूर के फेसबुक पेज पर मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भगवा ध्वज को अपना गुरु मानता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देश भर में गुरु दक्षिणाओं के कार्यक्रम होते हैं। संघ की हर शाखा ‘व्यास पूर्णिमा’ या गुरु पूर्णिमा पर गुरुपूजा और गुरु दक्षिणा का कार्यक्रम आयोजित करती है। इसका मुख्य मकसद है-प्राचीन भारत की उस गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाना, जिसमें शिक्षा पूरी करने वाले सभी शिष्य आदर और कृतज्ञता के भाव से अपने गुरु को यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित करते थे। इसमें धन की राशि नहीं, कृतज्ञता की भावना महत्त्व रखती है। गुरुपूजा का कार्यक्रम बड़ी सादगी के साथ संपन्न किया जाता है। स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में गणवेश में नहीं, बल्कि पारंपरिक भारतीय परिधान (धोती-कुर्ता या पाजामा-कुर्ता) में उपस्थित होते हैं। 1925 में अपनी स्थापना के तीन साल बाद संघ ने 1928 में पहली बार गुरुपूजा का आयोजन किया था। तब से यह परंपरा जारी है।

    गुरु दक्षिण कार्यक्रम का मकसद लोगों से जुड़ना
    अरुण आनंद की किताब ‘जानिए संघ को’ के अनुसार, गुरु दक्षिणा कार्यक्रम की अवधारणा संघ के प्रारंभिक दिनों में की गई थी। इसके दो उद्देश्य थे -पहला, संगठन के विस्तार के संगठन के भीतर से ही धन की व्यवस्था करना और दूसरा, यह स्थापित करना कि संघ में भगवा ध्वज ही सर्वोच्च गुरु है। बाद में गुरु दक्षिणा कार्यक्रम ऐसे स्वयंसेवकों को भी कम-से-कम वर्ष में एक बार जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गया, जो नियमित शाखा नहीं आ पाते। कम-से-कम वर्ष में एक बार सभी परस्पर मिल सकें। वर्ष में एक बार ‘गुरु दक्षिणा’ दी जाती है। आमतौर पर किसी महीने में एक या दो बार गुरु दक्षिणा के लिए तिथियां तय की जाती हैं।

    भगवा रंग ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक
    एडवांस कलर थेरेपी के अनुसार भगवा रंग समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना जाता है, यह रंग आंखों को सुकून देने के साथ क्रोध पर नियंत्रण करते हुए खुशी को बढ़ाने वाला माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में भगवा रंग बृहस्पति ग्रह का रंग है। यह ज्ञान और आध्यात्मिकता को बढ़ाने वाला माना जाता है। सूर्य की आग और वैदिक यज्ञ की समिधा से निकलने वाली आग भी भगवा रंग है। संघ के सरकार्यवाह रहे व प्रख्यात विचारक व चिंतक एचवी शेषाद्रि ने अपनी पुस्तक ‘आरएसएस: ए विजन इन एक्शन’ में लिखा है- भगवा ध्वज सदियों से भारतीय संस्कृति और परंपरा का श्रद्धेय प्रतीक रहा है। जब संघ के पहले सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ का शुभारंभ किया, तभी से उन्होंने इस ध्वज को स्वयंसेवकों के सामने समस्त राष्ट्रीय आदर्शों के सर्वोच्च प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया और बाद में व्यास पूर्णिमा के दिन गुरु के रूप में भगवा ध्वज के पूजन की परंपरा आरंभ की।

    गजनवी-गोरी के खिलाफ युद्ध में भगवा ध्वज आगे
    भारत में महमूद गजनवी हों या मुहम्मद गोरी सभी विदेशी आक्रांताओं और आक्रमणकारियो के खिलाफ युद्ध भी भगवा ध्वज के तले ही लड़े गए। भगवा रंग प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय प्रकृति की लालिमा नकारात्मक तत्वों को हटाती है। लंका पर आक्रमण करते समय भगवान राम ने अपने कुल वंश रघुवंश की ध्वजा के नीचे रावण से युद्ध किया था। कुर्म और स्कंद पुराणों के अनुसार रघुवंश के ध्वज पर तीन त्रिज्याएं अंकित थीं, जो अग्नि की ज्वालाएं जैसी दिखती थी। इस पर उनके कुलदेवता सूर्य की छवि अंकित थी।

    महाभारत काल में ध्वज पर हनुमान की छवि
    युद्धभूमि के लिए प्रस्थान से जाने से पहले योद्धा अपने हाथों से अपने रथ पर ध्वजा लगाते थे। महाभारत काल में अर्जुन युद्धभूमि के लिए जाने से पहले अपने रथ ‘नंदीघोष’ की परिक्रमा करते। फिर कवच पहनने के बाद अपनी कपि-ध्वजा फहराते थे। अर्जुन की ध्वजा पर भगवान हनुमान की छवि अंकित थी।

    महाराणा ने मुगलों के खिलाफ भगवा ध्वज का किया इस्तेमाल
    महाराणा प्रताप ने हल्दी घाटी के युद्ध में भगवा ध्वज का इस्तेमाल किया था। 17वीं शताब्दी में बीकानेर रियासत की ध्वजा भगवा और लाल रंग की थी, जिस पर बाज की आकृति अंकित थी। यह पक्षी देवी दुर्गा का प्रतिनिधित्व करता था। जोधपुर रियासत की ध्वजा को पंचरंग कहा जाता था, जिसमें भगवा, गुलाबी, सफेद, लाल, पीला और हरा रंग थे। नागपुर के भोसलें शासक भगवा ध्वज का प्रयोग करते थे। छत्रपति शिवाजी महाराज भगवा ध्वज का इस्तेमाल करते थे। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध में इसी भगवा ध्वज का इस्तेमाल किया था।

    ब्रिटिश भारत का पहला भगवा ध्वज सिस्टर निवेदिता ने बनाया
    प्रवज्या आत्मप्राण की किताब ‘सिस्टर निवेदिता ऑफ रामकृष्ण’ में कहा गया है कि मिस मैक्लियोड को सिस्टर निवेदिता ने 5 फरवरी, 1905 को एक पत्र लिखा-हमने राष्ट्रीय झंडे की एक रुपरेखा बनाई है, जिस पर वज्र अंकित है। हमने एक झंडा भी बना लिया है। मगर, अज्ञानतावश मैंने चीन के युद्ध के झंडे को अपना आदर्श बनाकर काले रंग का चुनाव किया। काला रंग भारत भारत में पसंद नहीं किया जाता। ऐसे में अगले झंडे मैं सिंदूरी और पीला रंग रहेगा।

    स्वदेशी आंदोलन के वक्त आया भगवा ध्यज
    साल 1905 में सिस्टर निवेदिता ने एक ध्वज बनाया जिसपर वज्र (इंद्र देवता का शस्त्र) अंकित था। इसका रंग लाल और पीला था। दिसंबर 1906 के कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सिस्टर निवेदिता के बनाए गए भगवा ध्वज को फहराया गया। इस अधिवेशन की अध्यक्षता दादाभाई नैरोजी ने की थी। सिस्टर निवेदिता का ध्वज वर्गाकार और सतह लाल थी। इसकी किनारियों पर चारों ओर 108 ज्योति बनी हुई थी। पीले रंग में वज्र बीच में और बांग्ला में ‘वंदे’ और दायीं ओर ‘मातरम’ अंकित था।

    कांग्रेस के झंडे पर भगवा का प्रयोग कब हुआ
    राष्ट्रीय झंडा समिति, 1931 की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 अप्रैल 1931 को कराची में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया-सात सदस्यों की एक समिति मौजूदा झंडे पर उठने वाले सवालों के जवाब तलाशने के साथ कांग्रेस की ओर से देश के एक नए प्रस्तावित झंडे पर विचार देने की जिम्मेदारी पूरी करेगी। समिति को अधिकार दिया गया कि वह सभी साक्ष्यो के साथ 31 जुलाई 1931 तक अपनी रिपोर्ट सौप दे। समिति ने एकमत से यह राय दी कि भारत का राष्ट्रीय झंडा एक ही रंग का होना चाहिए, यदि कोई एक रंग हो जो सभी भारतीयों में अधिक स्वीकृत हो, जो देश की प्राचीन सनातन परंपरा से मेल खाता हो, यह केसरिया या भगवा रंग ही हो सकता है।

    कलकत्ता में इस रंग के हजारों झंडे देखकर हैरान रह गए वामपंथी
    मार्च, 1981 में भारतीय मजदूर संघ ने अपने छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान जब साम्यवादी प्रभाववाले महानगर कलकत्ता की सड़कों पर विशाल जुलूस निकाला था, तब लोग हजारों हाथों में परंपरागत लाल झंडे की जगह केसरिया झंडे देखकर हैरान रह गए थे। कलकत्ता के प्रमुख अखबारों ने उस समय मजदूरों के बीच उभरी इस नई केसरिया ताकत को महसूस किया था।

    रणजीत सिंह, राणा सांगा, महाराणा प्रताप और शिवाजी ने लहराया भगवा
    संघ के महाराष्ट्र प्रांत के कार्यवाह नारायण हरि पालकर ने मराठी में एक किताब लिखी-‘भगवा ध्वज’ जो 1958 में प्रकाशित हुई थी। पालकर के अनुसार, सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह ने जब हिंदू धर्म की रक्षा के लिए हजारों सिख योद्धाओं की फौज का नेतृत्व किया, तब उन्होंने केसरिया झंडे का इस्तेमाल किया। यह ध्वज हिंदुत्व के पुनर्जागरण का प्रतीक है। इस झंडे से प्रेरणा लेते हुए महाराजा रणजीत सिंह के शासन काल में सिख सैनिकों ने अफगानिस्तान के काबुल-कंधार तक को फतह कर लिया था। उस समय सेनापति हरि सिंह नलवा ने सैनिकों का नेतृत्व किया था। पालकर ने लिखा है कि जब राजस्थान पर मुगलों का हमला हुआ, तब राणा सांगा और महाराणा प्रताप के सेनापतित्व में राजपूत योद्धाओं ने भी भगवा ध्वज से वीरता की प्रेरणा लेकर आक्रमणकारियों को रोकने के लिए ऐतिहासिक युद्ध किए। छत्रपति शिवाजी और उनके साथियों ने मुगल शासन से मुक्ति और हिंदू राज्य की स्थापना के लिए भगवा ध्वज की छत्रछाया में ही निर्णायक लड़ाइयां लड़ीं।

    पूर्ण आजादी का संघ ने किया था पूर्ण समर्थन
    जब कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया, तो डॉक्टर हेडगेवार ने एक सर्कुलर जारी किया कि सभी शाखाओं को कांग्रेस के सम्मान में प्रस्ताव पारित करने के लिए बैठकें करनी चाहिए और ये प्रस्ताव कांग्रेस समिति को भेजे जाने चाहिए। यह 1931 में हुआ। स्वतंत्रता प्राप्त करना और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च गौरव प्राप्त करना ही डॉक्टर हेडगेवार के जीवन का एकमात्र लक्ष्य था। ये बातें 17 से 19 सितंबर, 2018 तक नई दिल्ली में अपने तीन दिवसीय व्याख्यान में संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहीं।

    दिल्ली में संघ मुख्यालय में विराजमान हैं हनुमान जी
    दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का नया मुख्यालय ‘केशव कुंज’ बनकर तैयार हो गया है। नए दफ्तर में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। उसके अलावा बाहर की दीवारों पर स्वास्तिक चिन्ह देखे जा सकते हैं। आरएसएस के नए मुख्यालय में 3 टावर हैं। इन इमारतों का नाम साधना, प्रेरणा और अर्चना रखा गया है। तीनों टावर 12 मंजिला हैं, जिनमें लगभग 300 कमरे और अलग-अलग दफ्तर होंगे।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    News Maati

    Related Posts

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का आज होगा ऐलान, शाम 4 बजे चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

    March 15, 2026

     सोशल मीडिया ने बना दी जोड़ी, तीन फीट की दुल्हन और चार फीट के दूल्हे ने रचाई शादी

    March 3, 2026

    शराब घोटाला: केजरीवाल और सिसोदिया कोर्ट से बरी, सभी आरोपों से किए गए मुक्त

    February 27, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    Exit Poll में राजग को प्रचंड बहुमत, जानें कितनी मिलेगी सीट

    June 1, 20241,356

    रांची के बरियातू समेत नौ ठिकानों पर इडी की रेड, मंत्री के करीबी के घर से 30 करोड़ रुपये के कैश जब्त, गिनती के लिए मंगाई गयी मशीन

    May 6, 20241,028

    रेलवे के आठ कर्मचारी गिरफ्तार, होली के दिन शताब्दी एक्सप्रेस में हुड़दंग मचाने के आरोप

    March 17, 2025963

    रेलवे में अब नहीं दिखेगी अंग्रेजों के जमाने की यह निशानी, रेल मंत्री ने किया बड़ा ऐलान

    January 10, 2026780
    Don't Miss
    Blog

    झारखंड चेंबर और चीन बढाएंगे निवेश और व्यापार में सहयोग

    By News MaatiMarch 31, 20269

    रांची। झारखंड चेंबर और चीन निवेश और व्यापार को लेकर सहयोग को और अधिक बढाएंगे।…

    रांची के कई इलाकों में कल छह घंटे तक नहीं रहेगी बिजली

    March 31, 2026

    गन्नाथपुर मंदिर में 11 जोडे बंधे परिणय सूत्र में

    March 31, 2026

    मेयर रोशनी खलखो की मां का निधन

    March 31, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest Political news from The Pulse of Politics.

    About Us

    News Maati: Your trusted source for breaking news, insightful articles, and diverse perspectives.
    Stay informed with our comprehensive coverage of local and global events.

    Email Us: contact@newsmaati.com
    Contact: 7295050957

    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp

    नहीं रहे अंग्रेजों के जमाने के जेलर

    October 20, 2025

    पहलगाम हमले पर खुशी जताने वाला बोकारो से मोहम्मद नौशाद गिरफ्तार, 28 पर्यटकों की हत्या करने वाले आतंकवादियों को दिया था धन्यवाद

    April 23, 2025

    हमलावर को पकड़ने के लिए 20 टीम गठित, मुखबिरों का सहारा…CCTV में ‘हेक्सा ब्लेड’ लेकर भागता दिखा आरोपी

    January 16, 2025

    नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार होंगे

    August 6, 2024

    झारखंड चेंबर और चीन बढाएंगे निवेश और व्यापार में सहयोग

    March 31, 2026

    रांची के कई इलाकों में कल छह घंटे तक नहीं रहेगी बिजली

    March 31, 2026

    गन्नाथपुर मंदिर में 11 जोडे बंधे परिणय सूत्र में

    March 31, 2026

    मेयर रोशनी खलखो की मां का निधन

    March 31, 2026
    © 2026 News Maati. Developed & Hosted by Midhaxa Group
    • Home
    • Terms and Conditions
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.