
रांची। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली कल दिल्ली पहुंचे। जेडीयू के नेता सरयू राय और रघुवर दास भी दिल्ली में हैं। तीनों का एक साथ दिल्ली में होना महज संयोग है या किसी बड़े राजनीतिक खेल के पटकथा लेखन की पृष्ठभूमि, कहना तब तक मुश्किल है, जब तक आधिकारिक तौर पर कोई बात सामने नहीं आती। झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास फिलहाल ओडिशा के राज्यपाल हैं। इसके बावजूद झारखंड की राजनीति में उनकी रुचि कम नहीं हुई है। इसे इस बात से ही समझा जा सकता है कि वे अपने गृह क्षेत्र के कार्यक्रमों में अक्सर शिरकत करते हैं।



भाजपा के झारखंड चुनाव प्रभारी असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा ने रघुवर दास से तीन दिन पहले ही भुवनेश्वर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी। चर्चा है कि रघुवर अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए जमशेदपुर की अपनी पारंपरिक सीट चाहते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि भाजपा ने वह सीट नहीं दी तो रघुवर का पारिवारिक व्यक्ति निर्दलीय भी सरयू राय की तरह मैदान में उतर सकता है।
जमशेदपुर पूर्वी से विधायक सरयू राय अब जेडीयू के साथ हैं। इसलिए यह सीट अब जेडीयू की सिटिंग सीट हो गई है। जेडीयू एनडीए का पार्टनर है। इसलिए इस सीट पर सरयू राय की ही दावेदारी बनती है। पर, रघुवर की जिद के आगे भाजपा भी मजबूर है। शायद इसी खींचतान को सुलझाने के लिए तीनों को दिल्ली जाना पड़ा है। बहुत हद तक संभव है कि सरयू राय को जमशेदपुर पश्चिमी की सीट एनडीए आॅफर करे।
झारखंड में विधानसभा चुनाव की डुगडुगी अक्टूबर में बजने की पूरी संभावना है। केंद्रीय चुनाव आयोग की टीम ने हाल ही झारखंड का दौरा कर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप तीनों नेताओं की मौजूदगी में दिया जाएगा। सरयू राय की मौजूदगी इसलिए जरूरी थी कि पेच जमशेदपुर पूर्वी सीट पर फंस रहा है।
नीतीश कुमार की उपस्थिति सीटों की संख्या और क्षेत्र चयन को लेकर जरूरी है। इसलिए कि वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। रघुवर अपनी दलीलों से समझाएं कि कोल्हान में एनडीए की राह आसान करने के लिए सरयू को जमशेदपुर पूर्वी की सीट का मोह क्यों छोड़ देना चाहिए। उनका एक तर्क यह भी हो सकता है कि अनबन की स्थिति और वजह अब नहीं है तो सरयू को अपनी पारंपरिक सीट से ही चुनाव लड़ना चाहिए।

