पटना। साइबर अपराधी नेटवर्क बढ़ाने और लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाने के लिए बेरोजगारों को अपने जाल में फंसा रहे है। रोजगार के सपने दिखाकर युवाओं को पटना बुला रहे हैं और उन्हें ठगी के दलदल में धकेल रहे हैं। कहीं फ्लैट में उन्हें सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने और कमीशन के नाम पर साइबर ठगी कराया जा रहा है तो कहीं कॉल सेंटर खोलकर वेतन देने के साथ उनसे फोन कॉल के जरिए ठगी कराया जा रहा है।

आर्थिक अपराध इकाई व साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने दानापुर और रूपसपुर में चल रहे तीन फर्जी कॉल सेंटर का भंडाभोड़ किया था, जहां से 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें 15 लड़कियां और सात लड़के थे। यहां पूर्व नियोजित एवं संगठित तरीके से साइबर ठग गिरोह का संचालन किया जा रहा था।

इसमें कई युवक और युवतियों को आॅनलाइन नौकरी का लालच देकर शहर के अलग अलग इलाके से बुलाया गया था। वेतन देने के नाम पर इनसे साइबर ठगी का काम कराया जाता था। इसमें कई को यह पता भी नहीं होता था, कि वह जिसे रोजगार समझ रहे हैं, वह गिरोह के इशारे पर साइबर ठगी के जाल में फंस चुके हैं।

इसके पूर्व भी पटना के अलग अलग इलाकों साइबर थाने की पुलिस गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों के 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिन्हें नौकरी के नाम बुलाया गया और बाद में इन्हें मोटी कमाई और कमीशन का लालच देकर साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे।

साइबर ठग गिरोह पर्दे के पीछे रहकर लोगों के ठगी के लिए ऐसे युवकों को जाल में फंसाकर कंपनी तैयार करते थे, जिन्हें उन्हें बार में कुछ जानकारी न हो। दूसरे राज्यों में इंटरनेट मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर इन्हें निर्माण कंपनी या अन्य नौकरियों या कॉल सेंटर में काम का लालच देते हैं। पटना पहुंचने पर काम के नाम पर उन्हें फोन कॉल के जरिए लोगों को लोन या अन्य बहानों से ठगने का काम सौंप देते हैं।

पहले सैलरी देने का वादा, फिर कमीशन के नाम पर इन्हें फ्लैटों में रखा जाता है, जहां खाने-पीने की पूरी व्यवस्था होती है। जब पुलिस छापेमारी करती है तो मास्टरमाइंड नहीं मिलता, लेकिन गिरफ्तारी के जाल में फंसते हैं वह बेरोजगार, जो दूसरे राज्यों से बुलाए गए होते है।

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