
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में गुरुवार दोपहर तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में अल्पसंख्यक बहुल मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से अखिल भारतीय सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) के प्रत्याशी मौलाना शाहजान अली भी शामिल हैं।
सभी आरोपितों को गुरुवार को मालदा की जिला अदालत में पेश किया गया। अदालत में पेशी के दौरान शाहजान अली ने मीडिया से कहा कि उन्हें पुलिस ने राजनीतिक कारणों से झूठा फंसाया है क्योंकि वह एआईएसएफ के प्रत्याशी हैं।
उन्होंने दावा किया, “मैं उस स्थान पर मौजूद ही नहीं था जहां प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया था। मैं एक कार्यक्रम में गया था और वहीं से लौटते समय मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। यह मेरे खिलाफ साजिश है।”
उल्लेखनीय है कि बुधवार रात मालदा जिले के कालियाचक स्थित एक प्रखंड कार्यालय में “तार्किक विसंगति” श्रेणी में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से नाराज अल्पसंख्यक लोगों के एक समूह ने सात न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बना लिया था। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं।
सूचना मिलने के बाद गुरुवार तड़के लगभग 01 बजे वरिष्ठ जिला अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर करीब नौ घंटे बाद न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
जिले से यह भी खबर आई कि अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते समय उनके काफिले पर हमला करने की भी कोशिश की गई।
इस घटना पर गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत बताया।
पीठ ने भारतीय निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने पर विचार किया जाए। साथ ही पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव तथा मालदा के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
