
नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पारित गया। इस पर करीब 12 घंटे की चर्चा के बाद रात 2 बजे हुई वोटिंग में 520 सांसदों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 288 ने पक्ष में जबकि 232 ने विपक्ष में वोट डाले। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है। आज (गुरुवार) यह बिल राज्यसभा में पेश होगा। राज्यसभा से पारित होता है तो इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह बिल कानून के रूप में देश में वक्फ संपत्तियों पर लागू हो जाएगा।



ऑनलाइन होगा वक्फ का डेटाबेस
वक्फ बोर्ड संशोधन बिल के पारित होते ही वक्फ कानून में बड़े बदलाव होंगे। कानून के लागू होने के 6 महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति को सेंट्रल डेटाबेस पर रजिस्टर्ड करना अनिवार्य होगा। वक्फ में दी गई जमीन का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन पोर्टल पर 6 महीने के अंदर अपलोड करना होगा और कुछ मामलों में इस टाइम लिमिट को बढ़ाया भी जा सकेगा।
जमीन का ऑनलाइन डेटाबेस
वक्फ को डोनेशन में दी गई हर जमीन का ऑनलाइन डेटाबेस होगा और वक्फ बोर्ड इन प्रॉपर्टीज के बारे में किसी बात को छिपा नहीं पाएगा। किस जमीन को किस व्यक्ति ने डोनेट किया, वो जमीन उसके पास कहां से आई, वक्फ बोर्ड को उससे कितनी इनकम होती है, उस प्रॉपर्टी की देख-रेख करने वाले ‘मुतव्वली’ को कितनी तनख्वाह मिलती है, ये जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर मुहैया होगी। इससे वक्फ की प्रॉपर्टीज में ट्रांसपरेंसी आएगी और वक्फ को होने वाला नुकसान भी कम होगा।
गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना अनिवार्य
एक बड़ा बदलाव यह भी आएगा कि गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना जरूरी होगा। वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं के साथ दूसरे धर्म से जुड़े दो लोग शामिल होंगे। वक्फ बोर्ड में नियुक्त किए गए सांसद और पूर्व जजों का भी मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा। सरकार के मुताबिक इस प्रावधान से वक्फ में पिछड़े और गरीब मुस्लिमों को भी जगह मिलेगी और वक्फ में मुस्लिम महिलाओं की भी हिस्सेदारी होगी।

