
न्यूयार्क। अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने भारतीय छात्र कृष लाल ईसरदासानी को देश से निकाले जाने की ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी है। 21 वर्षीय ईसरदासानी यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और 2021 से F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अदालत में दाखिल दस्तावेजों में बताया गया कि ईसरदासानी ने पूरे समय पढ़ाई की है और उनकी अकादमिक स्थिति भी अच्छी रही है। वह अपने अंतिम सेमेस्टर में हैं और 10 मई, 2025 को डिग्री पूरी होने की उम्मीद है।
हालांकि, उन्हें 22 नवंबर, 2024 को एक मामूली मौखिक बहस के बाद डिसऑर्डरली कंडक्ट (अशांत आचरण) के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जिला अटॉर्नी ने मामला खारिज कर दिया और कोई चार्ज नहीं लगाया गया। इसके बावजूद, 4 अप्रैल, 2025 को यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट सर्विसेज (ISS) कार्यालय ने उन्हें सूचित किया कि उनका SEVIS रिकॉर्ड (विदेशी छात्रों का आधिकारिक रिकॉर्ड) समाप्त कर दिया गया है।
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा SEVIS टर्मिनेशन का कारण बताया गया — “क्रिमिनल रिकॉर्ड की पहचान या वीज़ा रद्द होने के चलते स्टेटस बनाए रखने में विफलता”। लेकिन ईसरदासानी को इस संबंध में कोई पूर्व सूचना, सफाई देने का मौका या अपील का अवसर नहीं मिला।
SEVIS समाप्त होने से ईसरदासानी अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाएंगे, न ही वे OPT (Optional Practical Training) के लिए आवेदन कर सकेंगे, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में कार्य अनुभव लेने की अनुमति देता है।
