
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में बने भारत की स्वदेशी एके -203 असॉल्ट राइफल को जल्द ही भारतीय सेना को सौंपा जाएगा। यह रक्षा उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है। इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आइआरआरपीएल) द्वारा बनाई जा रही इस राइफल का नाम “शेर” रखा गया है। उम्मीद है कि इससे सेना की छोटे हथियारों की क्षमता मजबूत होगी।
आइआरआरपीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने कहा कि अमेठी में एके-203 का उत्पादन गर्व की बात है। कंपनी सेना को समय पर इसकी डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि यह स्वदेशी राइफल अमेठी के मुंशीगंज में बनाई जा रही है। एके-203 ‘शेर’ का उत्पादन राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
शर्मा के अनुसार, भारत में एके-203 राइफल बनाने का फैसला 2019 के आसपास भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने लिया था। इसके तहत राइफल बनाने की तकनीक रूस से ली जानी थी और इसके बाद घरेलू उत्पादन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने थे। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने तय समय सीमा के भीतर राइफलें उपलब्ध कराने के लिए आइआरआरपीएल पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपना उत्पादन कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया है कि वह तय समय सीमा से पहले ही अनुबंध के तहत आपूर्ति पूरी कर सकेगी। कोरवा सुविधा का संचालन आइआरआरपीएल द्वारा किया जाता है, जो एक भारतीय रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और रूसी कंपनियों ‘कंसर्न कलाश्निकोव’, ‘रोसोबोरोनएक्सपोर्ट’ का संयुक्त उद्यम है।इस उद्यम की स्थापना भारत में छह लाख से अधिक एके-203 असॉल्ट राइफलें बनाने के लिए की गई थी।
