
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के ऐतिहासिक चुनावी नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरूआत कर दी है। तीन दशकों से मुंबई की सत्ता पर काबिज मातोश्री का वर्चस्व आखिरकार समाप्त हो गया है। शुक्रवार को घोषित परिणामों में भाजपा-शिंदे गठबंधन (महायुति) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर ठाकरे परिवार के अंतिम किले को ध्वस्त कर दिया है। अब यह साफ हो गया है कि देश के सबसे अमीर नगर निकाय में इस बार भाजपा का मेयर बैठेगा। बीएमसी के साथ ही हुए महाराष्ट्र की अन्य 28 महानगरपालिकाओं के चुनाव में से भी अधिसंख्य के परिणाम भाजपा के ही पक्ष में आए हैं।



कुल 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 127 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसमें भाजपा को 97 एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली शिवसेना को 30 सीटें हासिल हुई हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिलाकर 73 सीटें मिली हैं। इनमें 64 सीटें शिवसेना (यूबीटी) को एवं नौ सीटें मनसे को मिली हैं। ठाकरे बंधु 20 साल बाद साथ आकर भी बीएमसी की सत्ता हासिल नहीं कर पाए।
पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों के विपरीत इस बार महाविकास आघाड़ी से अलग होकर लड़ी कांग्रेस की स्थिति दो बड़े गठबंधनों के बीच सैंडविच बनकर रह गई। डा.भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी से गठबंधन करके भी कांग्रेस 15 सीटों से आगे नहीं बढ़ सकी।
ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व खत्म
बीएमसी चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव स्पष्ट रूप से शिवसेना (यूबीटी) की ओर होने के बावजूद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने छह सीटों पर जीत हासिल की है। इस बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने एक्स एकाउंट पर लिखा है कि भाजपा ने 2025-26 के महानगरपालिका चुनावों में जीत हासिल कर एक बार फिर इतिहास लिख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुभवी नेतृत्व एवं उनके साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मार्गदर्शन तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की कड़ी मेहनत से यह जीत हासिल हुई है। इससे पता चलता है कि प्रदेश की जनता भाजपा के प्रगति एवं विकास के एजेंडे को पसंद कर रही है। दशकों से मुंबई के दादर, परेल और लालबाग जैसे क्षेत्र शिवसेना (यूबीटी) का गढ़ माने जाते थे।
लेकिन इस बार उद्धव-राज के एक साथ आने के बावजूद मराठी मानुष का वोट दो हिस्सों में बंटता दिखाई दिया। शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे के प्रभाव वाले वर्ली और गिरगांव जैसे क्षेत्रों में भाजपा की मदद से सेंधमारी की, जिससे ‘ठाकरे ब्रांड’ की पकड़ ढीली पड़ गई।
देश के सबसे अमीर नगर निकाय में अब भाजपा का मेयर : बीएमसी का वार्षिक बजट 74,000 करोड़ से अधिक है, जो कई छोटे राज्यों के बजट से भी बड़ा है। पिछले 28 सालों से इस तिजोरी की चाबी ठाकरे परिवार के पास थी। भाजपा ने इस बार ‘भ्रष्टाचार मुक्त बीएमसी’ और ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ का नारा दिया था, जिसे मुंबई की जनता ने स्वीकार किया। विशेषकर गुजराती, उत्तर भारतीय और मध्यम वर्गीय मराठी मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में एकतरफा मतदान किया। दूसरी ओर शिवसेना का दो फाड़ होना उद्धव ठाकरे के लिए सबसे घातक साबित हुआ।

