रांची। असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर अब साफ हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हो पाया है। इसके बाद झामुमो ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।पार्टी ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है, जबकि एक सीट वामदलों के लिए छोड़ी गई है। दोनों दलों के बीच लंबे समय से सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।इस मुद्दे पर बातचीत के लिए असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई रांची पहुंचे थे। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी दिल्ली जाकर कांग्रेस नेतृत्व से चर्चा की थी। इसके बावजूद सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी।झामुमो ने अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी की रणनीति असम के आदिवासी और चाय बागान (टी-ट्राइब) समुदायों पर केंद्रित है, जिन्हें राज्य की राजनीति में निर्णायक माना जाता है। 126 सदस्यीय विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जिन पर झामुमो खास फोकस कर रही है।निर्वाचन आयोग ने झामुमो को असम चुनाव के लिए उसका पारंपरिक ‘तीर-कमान’ चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिया है, जिसे पार्टी अपनी पहचान और आदिवासी जुड़ाव का प्रतीक मानती है।गौरतलब है कि असम में फिलहाल भाजपा की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। ऐसे में झामुमो का अकेले चुनाव लड़ना राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। साथ ही, इसे पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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