
रांची। सुप्रीम कोर्ट में हजारीबाग के सेवायत जमीन की खरीद-बिक्री मामले में निलंबित आइएएस अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत की सुविधा प्रदान की है। अदालत ने विनय चौबे को देश नही छोड़ने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त लगाई और उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का भी निर्देश दिया है। हालांकि वे अभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि हजारीबाग में ही एक अन्य जमीन घोटाले से संबंधित मामले में उन्हें आरोपित बनाया गया है।



सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से कहा गया कि इस मामले में आरोपित विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उन्हें भी जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित मामला वर्ष 2009- 10 का है, जब वे हजारीबाग के उपायुक्त थे। वह पिछले सात माह से जेल में बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि विनय चौबे अन्य चार मामलों में भी आरोपित हैं।

