
नई दिल्ली । कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सोरेन की ओर से फाइल की गई पिटीशन में इस फैक्ट को छिपाया गया कि इस मामले में ईडी की स्पेशल कोर्ट संज्ञान ले चुकी है।



जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की वेकेशन बेंच ने याचिका पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त की, जिसके बाद सोरेन के वकील कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली।
इससे पहले बुधवार को कार्यवाही के दौरान कपिल सिब्बल ने दलीलें रखीं, लेकिन कोर्ट ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि उनके सामने तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और यह अच्छा आचरण नहीं है।कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सोरेन की ओर से फाइल की गई पिटीशन में इस फैक्ट को छिपाया गया कि इस मामले में ईडी की स्पेशल कोर्ट संज्ञान ले चुकी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की वेकेशन बेंच ने याचिका पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त की, जिसके बाद सोरेन के वकील कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली।इससे पहले बुधवार को कार्यवाही के दौरान कपिल सिब्बल ने दलीलें रखीं, लेकिन कोर्ट ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि उनके सामने तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और यह अच्छा आचरण नहीं है।
सिब्बल ने कहा था कि हेमंत सोरेन पर वर्ष 2009-10 में इस जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया, लेकिन इसे लेकर कहीं कंप्लेन दर्ज नहीं है। अप्रैल 2023 में ईडी ने इस मामले में कार्यवाही शुरू की और सिर्फ कुछ लोगों के मौखिक बयान के आधार पर बता दिया कि यह जमीन हेमंत सोरेन की है। ईडी के पास इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि हेमंत सोरेन ने इसपर कब, कहां और किस तरह कब्जा किया।
ईडी की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि बरियातू की 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन का अवैध कब्जा है। इस जमीन के कागजात में भले हेमंत सोरेन का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन जमीन पर अवैध कब्जा पीएमएलए के तहत अपराध है।
उन्होंने कहा कि सक्षम न्यायालय द्वारा मामले में संज्ञान लिया जा चुका है। जमानत याचिका को रद्द करते हुए सक्षम अदालत ने यह कहा है कि प्रथम दृष्टया आरोप सही प्रतीत होते हैं। इसके बाद कपिल सिब्बल ने कहा था कि वह जमानत नहीं मांग रहे हैं, वह तो ईडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती दे रहे हैं।सिब्बल ने कहा था कि हेमंत सोरेन पर वर्ष 2009-10 में इस जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया, लेकिन इसे लेकर कहीं कंप्लेन दर्ज नहीं है। अप्रैल 2023 में ईडी ने इस मामले में कार्यवाही शुरू की और सिर्फ कुछ लोगों के मौखिक बयान के आधार पर बता दिया कि यह जमीन हेमंत सोरेन की है। ईडी के पास इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि हेमंत सोरेन ने इसपर कब, कहां और किस तरह कब्जा किया।ईडी की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि बरियातू की 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन का अवैध कब्जा है। इस जमीन के कागजात में भले हेमंत सोरेन का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन जमीन पर अवैध कब्जा पीएमएलए के तहत अपराध है।उन्होंने कहा कि सक्षम न्यायालय द्वारा मामले में संज्ञान लिया जा चुका है। जमानत याचिका को रद्द करते हुए सक्षम अदालत ने यह कहा है कि प्रथम दृष्टया आरोप सही प्रतीत होते हैं। इसके बाद कपिल सिब्बल ने कहा था कि वह जमानत नहीं मांग रहे हैं, वह तो ईडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती दे रहे हैं।

