
रांची । झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेज दिया। अब इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होगी।
अब तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया : पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया है। ये जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दाखिल की है। याचिका में जेपीएससी की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिका में राज्य स्तर पर चल रही जांच को सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।
निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल : याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने परीक्षा से संबंधित मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, उपस्थिति रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक आंकड़े, परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज, स्कैनिंग रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने की भी मांग की है, ताकि जांच के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
दो हस्तक्षेप याचिकाएं भी दाखिल : इस मामले में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की ओर से भी दो हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की गई हैं। मंच की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। जेपीएसी परीक्षा को लेकर झारखंड में अभ्यर्थी और छात्र संगठन लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। मामले में राज्य स्तर पर सीआईडी जांच भी चल रही है।

