पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि कुछ लोग मतदान के कुछ दिन पहले जीविका दीदियों के नाम पर अपने परिवार के लिए आजीविका तलाश रहे हैं। आधी आबादी के लिए चांद-तारे तोड़ लाने की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन-बेटियों को पता है कि उनके उत्थान और सम्मान के लिए किसने काम किया है।

बिहार की बहन-बेटियां एक बार फिर से एनडीए की सरकार बनाने जा रही हैं। वर्ष 2005 में बिहार से किया वादा हमें हमेशा याद रहता है। जब तक मैं हूं बिहार को और विशेषकर बहन-बेटियों को आगे बढ़ने से कोई शक्ति रोक नहीं सकती। नीतीश ने लिखा कि कुछ लोगों द्वारा जीविका दीदियों और बिहार की आधी आबादी का हितैषी दिखने की कोशिश की जा रही। बिहार की जनता ने इन लोगों को भी मौका दिया था, लेकिन तब इनका ध्यान सेवा करने से ज्यादा मेवा खाने पर लगा हुआ था। इनके कार्यकाल में महिलाओं का विकास सिर्फ इनके परिवार तक सीमित था। सीएम ने कहा कि इन लोगों के राज में बिहार की महिलाओं ने जो दुख-दर्द और जंगलराज का दंश झेला है, वह किसी से छिपा नहीं है। ऐसे लोगों को पता होना चाहिए कि यह 2005 से पहले वाला बिहार नहीं है। बिहार की बहन-बेटियां अब पढ़ रही हैं। आगे बढ़ रही हैं, नौकरी कर रहीं, स्वरोजगार में लगी हैं और नौकरियां दे रही हैं। बिहार और देश का नाम रोशन कर रही हैं।

मु्ख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर मुजफ्फरपुर में 44 जीविका दीदियों द्वारा चलाए जा रहे क्लाउड किचन की जानकारी भी साझा की है। बताया कि इनका सालाना टर्नओवर तीन करोड़ रुपए है और मुनाफा 50 लाख। जीविका दीदियां अपने अलग-अलग कामों से बिहार और देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने यह भी लिखा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 फीसद आरक्षण की व्यवस्था की। महिलाओं के लिए डोमिसाइल की नीति लागू की। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए 50 फीसद आरक्षण लागू किया। जन्म से लेकर स्नातक करने तक हर बच्ची पर 94,100 रुपए खर्च कर रही। हर परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए 10 हजारव रुपए दिए जा रहे। रोजगार चलने पर उन्हें दो लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

मालूम हो कि एक दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने यह कहा था कि अगर उनकी सरकार आयी तो जीविका दीदियों को वह 30 हजार रुपए प्रतिमाह का मानदेय कर देंगे।

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