रांची। बिहार में झारखंड की सीमा से सटे इलाकों में जहर का अंतरराष्ट्रीय कारोबार हो रहा है। इन इलाकों में जहरीले सांप पकड़े जा रहे हैं। उनका विष निकाला जा रहा है और जहर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तस्करी के माध्यम से बेंचा जा रहा है। ये खुलासा बिहार के औरंगाबाद से सटे झारखंड के पलामू जिले की पुलिस ने किया है। मामले में वहां की पुलिस ने 80 करोड़ की कीमत का सर्प विष भी बरामद किया है। साथ ही औरंगाबाद के देव के तीन सर्प विष तस्करों को भी गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार विष तस्करों में देव के नया बाजार चांदनी चौक निवासी पिता-पुत्र सेराज मियां, मेराज रंगरेज और एक अन्य शामिल है। मामले में झारखंड पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।

दरअसल, झारखंड की पलामू पुलिस को खुफिया इनपुट मिला था कि बिहार के सर्प विष तस्कर अच्छी-खासी मात्रा में सांप के जहर की एक खेप की सप्लाई देने पलामू से होकर बगल से दूसरे प्रदेश में डिलेवरी देने जा रहे हैं। ये भी पता चला कि कोई विदेशी ग्राहक उनका इंतजार कर रहा है। इस सूचना पर पलामू पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। अभियान के दौरान ही वहां की पुलिस ने तीन सर्प विष तस्करों को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद सर्प विष तस्करों की पहचान बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वालों के रूप में हुई। गिरफ्तारी के बाद सर्प विष तस्करों ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया कि जंगलों से सांप पकड़ कर विष निकालने का काम किया जाता है। इस काम में वें सांप पकड़ने में माहिर कही जाने वाली नट जाति के लोगों की सेवा लेते है।

विदेशों में डिमांड : सांपों का विष उतारने के बाद वें उसे छोटे-छोटे प्लास्टिक के डिंब्बों में रखते है और उसे गिरोह के शीर्ष तस्करों तक पहुंचाते है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सर्प विष तस्करों का गिरोह सांपों के जहर को निकालकर उसकी खेप को अपने नेटवर्क के बड़े तस्करों को उपलब्ध कराता है। बड़े तस्कर इसे ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि सर्प विष की इस खेप को किसी विदेशी ग्राहक को बेचा जाना था, जो संभवत: झारखंड की सीमा से सटे किसी दूसरे प्रदेश में बैठा था। पुलिस सूत्रों ने कहा कि झारखंड पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह सर्प विष तस्कर गिरोह कब से सक्रिय है और इसके तार किन-किन अंतर्राष्ट्रीय सर्प विष तस्कर गिरोहों से जुड़े हैं।

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