
नयी दिल्ली: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि सीट संख्या में थोड़ी वृद्धि के बावजूद पार्टी लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन से खुश नहीं है और वह इस बारे में गंभीर आत्ममंथन करेगी कि जमीन पर संघर्ष शुरू करने की इसकी क्षमता एवं सीट जीतने के लिए इसकी ताकत के बीच अंतर को कैसे कम किया जाए।



माकपा महासचिव ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि पार्टी में कुछ निराशा है क्योंकि वामपंथी संगठनों द्वारा कई जनसंघर्षों का नेतृत्व किए जाने बावजूद इसका प्रभाव उसके चुनावी प्रदर्शन में दिखाई नहीं दिया। वर्तमान में वाम दलों द्वारा शासित एकमात्र राज्य केरल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवेश के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा कि वाम दलों का वोट प्रतिशत बरकरार है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के कुछ वोट भाजपा की ओर स्थानांतरित हो गए हैं।
हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में वामपंथी दलों ने लोकसभा में अपनी सीट संख्या बढ़ाकर आठ कर ली, जो 17वीं लोकसभा में पांच थी।
माकपा ने चार सीट पर जीत दर्ज की, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने दो-दो सीट जीतीं। येचुरी ने कहा, ‘‘वाम दलों ने लोकसभा में अपनी उपस्थिति में थोड़ी वृद्धि की है, लेकिन हम खुश नहीं हैं। वास्तव में, हम थोड़ा निराश हैं क्योंकि वाम नेताओं के नेतृत्व में किए गए सभी संघर्षों के बावजूद हम इसे चुनावी प्रदर्शन के रूप में नहीं भुना सके।’’
उन्होंने कहा, ‘एक गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है। हम ऐसा करेंगे और आवश्यक सुधार करेंगे ताकि आने वाले दिनों में जनसंघर्ष को शुरू करने और बनाए रखने की वामपंथियों की क्षमता और दृढ़ संकल्प तथा उनके चुनावी प्रदर्शन के बीच अंतर को कम किया जा सके।’
येचुरी ने कहा कि पार्टी के पोलित ब्यूरो ने फैसला किया है कि लोगों की आजीविका के मुद्दों पर संघर्ष तेज किया जाएगा जिनमें किसानों का संघर्ष, रोजगार के लिए युवाओं का संघर्ष, शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे और नीट परीक्षा संबंधी चिंताओं जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘ये वे संघर्ष हैं जो संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह होंगे।’
केरल में त्रिशूर सीट पर भाजपा के सुरेश गोपी की जीत के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा कि भाजपा ने यूडीएफ के मतों में सेंध लगाई।
उन्होंने कहा, ‘यह बहुत चिंताजनक है। यदि कांग्रेस का आधार भाजपा की ओर बढ़ रहा है, तो यह न केवल केरल के लिए बल्कि देश में अन्य जगहों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।’
येचुरी ने कहा कि हालिया चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की भाजपा की कोशिशें नाकाम रहीं और उसका अयोध्या में फैजाबाद सीट हारना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वे कश्मीर में हार गए जबकि उन्होंने कहा था कि संबंधित अनुच्छेद को हटाने से कश्मीर का भारत में एकीकरण हुआ है। वे कश्मीर में कोई भी सीट नहीं जीत पाए।’’

