लखनऊ। लोकसभा में मैराथन चर्चा के बाद वक्‍फ संशोधन विधेयक बिल रात दो बजे पास हो गया। आज राज्‍यसभा में इस बिल पर चर्चा होगी। इस बीच, टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्‍हा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जिसकी काफी चर्चा हो रही है। इस वीडियो में वह सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल से गर्मजोशी से मिलते नजर आ रहे हैं। जगदंबिका पाल वक्‍फ बिल के लिए बनी जेपीसी के अध्‍यक्ष भी हैं। सदन के भीतर जगदंबिका पाल ने अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष को बिल का विरोध करने पर जमकर धोया। दूसरी ओर, सदन के बाहर इन नेताओं की केमिस्‍ट्री देखने लायक थी।

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हुए लिखा है- ‘संसद के बाहर/अंदर दोस्तों से मिलकर हमेशा खुशी होती है। हमारे बहुत प्यारे दोस्त, पूर्व/भविष्य के सीएम अखिलेश यादव और एक बहुत ही वरिष्ठ सांसद, एक बहुत ही अच्छे इंसान जगदंबिका पाल के साथ मुलाकात हुई।’

इस वीडियो में अखिलेश यादव डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल का हाथ पकड़कर आत्‍मीयता के साथ बतियाते नजर आ रहे हैं। पीछे डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव भी खड़े हुए हैं। इस बीच सामने से शत्रुघ्न सिन्‍हा दिखते हैं तो अखिलेश उन्‍हें बुलाते हैं। शत्रुघ्न सिन्‍हा पास जाते हैं और जगदंबिका पाल और अखिलेश से हंसते हुए बाते करते हैं।


जिन्‍होंने बिल फाड़ा, वे लोग असंवैधानिक: जगदंबिका पाल

दूसरी ओर, जगदंबिका पाल ने लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष को जमकर सुनाया। उन्‍होंने कहा- ‘विपक्ष के लोग कह रहे हैं कि वक्‍फ संशोधन बिल असंवैधानिक हैं। अभी आप लोगों ने देखा कि ओवैसी साहब ने बिल को हाथ में लेकर फाड़ दिया। असंवैधानिक ये बिल नहीं बल्कि वे लोग हैं जिन्‍होंने बिल फाड़ने का काम किया है। मैं पूछना चाहता हूं कि उन्‍होंने ये बिल क्‍यों फाड़ दिया।’


‘अखिलेश जी, आपको भी पता होगा, आप भी मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं’

जगदंबिका पाल ने कहा- ‘1911 में ब्रिटिश सरकार ने दिल्‍ली में जब लुटियन जोन बनाया तो यहां की जमीनों का अधिग्रहण किया। कांग्रेस ने इनमें से 123 प्रॉपर्टी को डिनोटिफाई करके वक्‍फ बोर्ड को दे दिया। अखिलेश जी, आपको भी पता होगा। आप भी मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं। अगर सरकार किसी जमीन का अधिग्रहण कर ले तो फिर उसको डिनोटिफाई करके किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। मैं पूछना चाहता हूं कि यह तुष्टिकरण नहीं है तो क्‍या है। 1911 में ब्रिटिशर्स ने जो जमीन अधिग्रहीत की थी, 1970 में वक्‍फ बोर्ड उसे अपना बता रहा है। ऐसा पूरी दुनिया में कही नहीं होता है। जिस जमीन को 57 साल पहले ब्रिटिशर्स ने लेकर उसका मुआवजा दे दिया था, उसे अब वक्‍फ बोर्ड अपनी जमीन बताकर दावा ठोक दे रहा है।’

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