
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 50 आधार अंक की बड़ी कटौती की है। केंद्रीय बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कमी की है। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में 25-25 बेसिस अंक की कटौती की थी। इस तरह बैंक तीन बार में रेपो रेट में 1 फीसदी की कटौती कर चुका है। इसके बाद कई बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। इस बार पुराने लोन लेने वालों को नए लोन लेने वालों से ज्यादा फायदा हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंक होम लोन पर अपने स्प्रेड को थोड़ा बदल सकते हैं। होम लोन पर पहले से ही बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 50 bps कम कर दिया है। यह बदलाव 7 जून से लागू हो गया है। अब बैंक की RLLR 8.15% हो गई है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी अपनी RLLR को 50 bps घटाकर 8.35% कर दिया है। यह आज यानी 9 जून से लागू हो गया है। हालांकि PNB ने अपनी MCLR में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने भी अपनी रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट को 50 bps कम करके 8.35% कर दिया है। यह 6 जून से प्रभावी है।
किस बैंक ने कितना घटाया
यूको बैंक ने अपनी MCLR और RLLR दोनों को कम किया है। बैंक ने अपनी RLLR को 50 bps घटाकर 8.30% कर दिया है। यह 9 जून से लागू है। इसके साथ ही, बैंक ने अपनी MCLR को भी 10 bps तक कम किया है। अब यूको बैंक की एक साल की MCLR 9% है। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक ने अपनी MCLR को 10 bps तक कम कर दिया है। यह बदलाव 7 जून से लागू हो गया है। इस कटौती के बाद, ओवरनाइट और एक महीने की दरें 10 bps घटकर 8.9% हो गई हैं।
RBI के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट लोन को रेपो रेट के हिसाब से रीसेट किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि पुराने लोन लेने वालों को ब्याज दरों में अपने आप कमी दिखेगी। लेकिन नए लोन लेने वालों को शायद पूरा फायदा न मिले। ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंक अपने मुनाफे को बचाने के लिए रेपो रेट पर लगने वाले स्प्रेड को एडजस्ट कर सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मामले में नए लोन लेने वालों के लिए होम लोन की दरें संशोधन के बाद 8% से शुरू होती हैं।
