
जयपुर। राजस्थान कैडर के वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी किशन सहाय मीणा को चुनाव आयोग ने निलंबित कर दिया है। किशन सहाय पर झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान ड्यूटी छोड़कर बिना पूर्व सूचना के जयपुर लौटने का आरोप है। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को 11 नवंबर को पत्र जारी कर उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश दिए।
चुनाव आयोग ने किशन सहाय मीणा को झारखंड विधानसभा चुनाव में गुमला जिले के 67-सिसई, 68-गुमला, और 69-बिशुनपुर निर्वाचन क्षेत्रों में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। आयोग द्वारा उन्हें निर्देश दिए गए थे कि वे नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन से अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित रहें और चुनाव संबंधी सभी गतिविधियों की निगरानी करें। इसके बावजूद, सहाय ने 28 अक्टूबर को बिना आयोग की अनुमति के अपनी ड्यूटी छोड़कर जयपुर लौटने का निर्णय लिया। चुनाव आयोग ने इसे सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की।
चुनाव आयोग ने इस मामले में राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बताया कि किशन सहाय मीणा की ड्यूटी झारखंड विधानसभा चुनाव में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तय की गई थी, और उनके बिना सूचना ड्यूटी छोड़कर लौटने से चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार, पुलिस पर्यवेक्षक की नियुक्ति भारत के संविधान के तहत की जाती है, और चुनाव के दौरान उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसीलिए सहाय की इस लापरवाही को अनुशासनहीनता के रूप में देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित किया गया।
यह पहली बार नहीं है जब किशन सहाय विवादों में आए हैं। इससे पहले भी वे विभिन्न विवादित टिप्पणियों और कार्यशैली के कारण चर्चा में रहे हैं। एक समय पर उन्होंने धार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि “धर्म ग्रंथों में जिनका भी वर्णन है, वह कल्पना मात्र की बातें हैं।” उनकी इस टिप्पणी के कारण व्यापक विवाद हुआ था और प्रशासन को भी जवाब देना पड़ा था।
आईपीएस अधिकारी का सफर
किशन सहाय एक प्रमोटी आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने साल 2013 में आईपीएस का पदभार संभाला। अगस्त 2013 में उन्हें टोंक जिले का पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद जनवरी 2014 में उन्हें अजमेर GRP में स्थानांतरित कर दिया गया। वहां एक साल कार्यरत रहने के बाद उन्हें प्रशासनिक कारणों से एपीओ (Awaiting Posting Orders) बना दिया गया था। करीब छह महीने तक एपीओ रहने के बाद उन्हें सीआईडी-सीबी में एसपी के पद पर लगाया गया। यहां उन्होंने साढ़े चार साल तक सेवाएं दीं। इसके बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय में डीआईजी आर्म्ड बटालियन के रूप में पदस्थ किया गया, जहां से वे डीआईजी से आईजी बने।
