
रांची। आजसू के 41 वें स्थापना दिवस पर सोमवार को धनबाद में जनाक्रोश मार्च निकाला जाएगा और झारखंड से भ्रष्ट और माफिया राज खत्म करने के लिए उलगुलान का आगाज किया जाएगा। जनाक्रोश मार्च में आजसू प्रमुख सुदेश महतो, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, विधायक निर्मल महतो सहित झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल होंगे। यह जानकारी पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर और हसन अंसारी ने पार्टी के हरमू स्थित कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
मौके पर केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि झारखंड राज्य आजसू के संघर्ष और आंदोलनकारियों की कुबार्नी का परिणाम है। 1986 में आजसू के गठन के बाद झारखंड आंदोलन को नया तेवर मिला। आजसू की बंदीझ्रआर्थिक नाकेबंदी ने 1989 में केंद्र सरकार को पहली बार वार्ता के लिए विवश किया। वार्ता के परिणामस्वरूप केंद्र ने झारखंड समस्या के अध्ययन के लिए झारखंड विषयक समिति का गठन किया। इसके बाद 1995 में जैक बना, जिसे आजसू ने खारिज कर दिया। 1999 में आजसू के एनडीए में शामिल होने के बाद अलग राज्य बना और उसका नामकरण झारखंड हुआ। झारखंड बनने के बाद नई राजनीतिक भूमिका में आजसू पार्टी नामकरण किया गया।
वहीं केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी ने कहा कि शहीद निर्मल महतो ने 40 वर्ष पूर्व आजसू की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार प्रत्येक मोर्चे पर विफल है और जनता खुद को छला महसूस कर रही है। जनता में आक्रोश है। कोयलांचल में अवैध खनन का विरोध करने पर आजसू नेताओं पर हमले और झूठे मुकदमे किए गए और जेल भेजा गया। यह सरकार भ्रष्ट और माफिया की संरक्षक सरकार है। आजसू जनाक्रोश मार्च के माध्यम से इस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करेगी। इस सरकार से छात्र, युवा, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक सभी निराश हैं।

