
नयी दिल्ली। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के आकाश का एक उज्ज्वल सितारा गुरुवार सुबह सदा के लिए डूब गया। पद्म विभूषण से सम्मानित दिग्गज गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। पंडित मिश्र की बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि वे करीब सत्रह से अठारह दिन अस्पताल में भर्ती रहे और गुरुवार तड़के चार बजे अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में एक बेटा और तीन बेटियां हैं।



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने और भारतीय परंपरा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने में अद्वितीय योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद मिला। वर्ष 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति।
संगीत का अमूल्य धरोहर : बनारस घराने की परंपरा से जुड़े पंडित मिश्र अपनी ठुमरी, दादरा, कजरी और भजन गायकी के लिए विख्यात रहे। उन्होंने संगीत को सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जन-जन तक पहुंचाया। बनारसी शैली को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है।
पंडित मिश्र को कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें पद्म भूषण और पद्म विभूषण शामिल हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों को संगीतजगत हमेशा याद रखेगा।

