
नई दिल्ली। पोप फ्रांसिस, कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु और लाखों श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक, का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वेटिकन के प्रवक्ता के अनुसार, पोप फ्रांसिस ने सोमवार को कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से न केवल कैथोलिक समुदाय, बल्कि पूरी दुनिया में गहरा शोक व्याप्त है।
पोप फ्रांसिस का जन्म 17 दिसंबर 1936 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनका असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोलियो था। वर्ष 2013 में पोप चुने जाने के बाद वे पहले लैटिन अमेरिकी, पहले जेसुइट और पहले गैर-यूरोपीय पोप बने, जिन्होंने आधुनिक युग में चर्च को नई दिशा देने का कार्य किया।
अपने पूरे कार्यकाल में पोप फ्रांसिस ने गरीबी, पर्यावरण संरक्षण, आप्रवासी अधिकार, और समानता जैसे विषयों को प्राथमिकता दी। वे अपने सरल जीवन, करुणा और वैश्विक भाईचारे के संदेश के लिए याद किए जाएंगे। उन्होंने बार-बार कहा कि “चर्च को लोगों के पास जाना चाहिए, न कि लोगों को चर्च के पास।”




