नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना करते हुए इसे ‘अत्यंत प्रेरणादायी’ बताया। उन्होंने कहा कि भागवत का संबोधन राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता, चरित्र निर्माण और समाज के सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर कहा कि नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव के अवसर पर मोहन भागवत ने राष्ट्र की प्रगति और सामाजिक एकता को लेकर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने सेवा और राष्ट्र निर्माण पर दिए गए जोर की भी सराहना की।

पीएम मोदी ने कहा कि सेवा और राष्ट्र निर्माण संघ के स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ये पहल बेहद महत्वपूर्ण हैं।

‘पंच परिवर्तन’ को बताया सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण खाका

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संगठन के स्थापना दिवस पर आयोजित वार्षिक विजयादशमी रैली को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने आत्म-जागरूकता, स्वदेशी, सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया।

भागवत ने बताया कि संघ के शताब्दी समारोह के तहत पिछले एक वर्ष में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विजयादशमी उत्सव को उन्होंने साल भर चली गतिविधियों के समापन का अवसर बताया।

उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को सामाजिक नवीनीकरण, राष्ट्रीय प्रगति और व्यक्तिगत आचरण में बदलाव लाने का महत्वपूर्ण खाका बताया। इसके तहत पांच प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है।

इन पांच विषयों पर आधारित है ‘पंच परिवर्तन’

  1. सामाजिक समरसता: समाज में सद्भाव और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना।
  2. कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कारों, मूल्यों और जागरूकता को मजबूत करना।
  3. पर्यावरण चेतना: प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना।
  4. स्व-बोध और स्वदेशी: अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझना और स्वदेशी को प्रोत्साहित करना।
  5. नागरिक अनुशासन: नागरिकों में जिम्मेदारी, नियमों के पालन और अनुशासित व्यवहार की भावना विकसित करना।

व्यवहार में बदलाव लाने पर दिया जोर

मोहन भागवत ने कहा कि ‘पंच परिवर्तन’ से जुड़े विषयों की प्रासंगिकता आज व्यापक स्तर पर महसूस की जा रही है। परिवार, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण जैसे मुद्दों को दुनिया भर के लोग समझते हैं और इनकी आवश्यकता भी महसूस करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘पंच परिवर्तन’ केवल एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम नहीं है। इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। भागवत ने स्वयंसेवकों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक आचरण में सकारात्मक बदलाव लाएं और इन विचारों को व्यवहार में उतारकर स्थायी आदत बनाएं।

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