
पटना। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से 127 किलोमीटर लंबे पटना-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। पहले चरण में पंचायतों के मुखिया और जिला पार्षद के सहयोग दोनों तरफ 50 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इसमें बड़ी संख्या में फलदार पौधे भी होंगे। यह एक सामुदायिक कृषि को भी बढ़ावा देने का सरकार का प्रयास होगा। योजना की खास बात यह है कि हर करीब पांच किलोमीटर तक एक ही तरह के फलदार पेड़ लगाए जाएंगे।



रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित : इनमें आम, अमरूद, जामुन, लीची, कटहल, आंवला, बेल, नींबू, सहजन, नीम, बरगद, पीपल और पाकड़ के पेड़ होंगे। इस पहल से किसानों को सीधा फायदा होगा। सड़क के किनारे लगे पेड़ों से मिलने वाले फलों को आसानी से बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे ढुलाई खर्च कम होगा। इस योजना से सिर्फ फल ही नहीं रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जाएंगे। इससे मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सहजन के पेड़ पर मधुमक्खी पालन : खासकर सहजन के पेड़ों पर होने वाला शहद उच्च गुणवत्ता का माना जाता है, जिससे अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। गया-डोभी मार्ग पर दादा का दालान खोलने की भी योजना है, जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और यात्रियों को आराम करने की सुविधा। यहां आने वाले यात्री चाय, काफी, स्वादिष्ट व्यंजन का भी लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा जगह जगह पर सेल्फी प्वाइंट भी विकसित किए जाएंगे जहां वाहन पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी।

