
पटना। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जंगलराज चेहरे और भेष बदलकर लौटना चाहता है। बिहार की जनता सावधान रहे, गलती से भी अगर महाठगबंधन की सरकार आई तो राज्य फिर से उसी अंधेरे में चला जाएगा। गृह मंत्री ने एनडीए के अंदर नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और उन्हीं के नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ रहा है। इसमें कोई भ्रम नहीं है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री का निर्णय विधायक दल करता है, लेकिन एनडीए के भीतर कोई असमंजस नहीं है। शाह ने कहा कि कुछ लोग हर चुनाव में एकनाथ शिंदे खोजने लगते हैं, लेकिन बिहार में नीतीश जी का नेतृत्व अटूट है।



तेजस्वी का 10 लाख नौकरी का वादा छलावा : तेजस्वी यादव के 10 लाख सरकारी नौकरियों के वादे को अमित शाह ने अव्यावहारिक बताया और कहा कि इतना करने के लिए बिहार का बजट चार गुना बढ़ाना पड़ेगा। 12 लाख 50 हजार करोड़ रुपये कहां से आएंगे? जनता को समझना चाहिए कि ऐसे वादे सिर्फ छलावा हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 10,000 रुपये देने का वादा वोट खरीदने की कोशिश नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का रोडमैप है। हमने लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है, यह कोई चुनावी जुमला नहीं।
स्वरोजगार से ही रुकेगा पलायन : शाह ने पलायन को बिहार की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि सरकार अब स्वरोजगार मॉडल पर काम कर रही है। अगर बिहार का युवा अपने गांव में ही 25,000 रुपये महीने कमाने लगे तो वह न मुंबई जाएगा, न केरल। हमने हर पंचायत में लघु उद्योग और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने का खाका तैयार किया है। उन्होंने बताया कि बिजली, शौचालय, गैस और आवास जैसी सुविधाओं से नई नींव तैयार हो चुकी है। अब अगला कदम स्किल डेवलपमेंट और माइक्रो-उद्यमों का विस्तार है।
जंगलराज फिर न लौटें : तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री बोले- आज भी आरजेडी के कार्यकर्ता लालू यादव के पैर छूकर टिकट लेते हैं। चेहरा भले तेजस्वी का हो, नियंत्रण वहीं का है। 17 महीने की सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे, तेजस्वी सिर्फ पद पर थे। जंगलराज का डीएनए वही है, बस चेहरा बदला है।
नक्सलवाद 2026 तक खत्म करेंगे : अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। पहले यह 130 जिलों तक फैला था, अब सिर्फ 11 बचे हैं। तीन बड़े नक्सली बच गए हैं- हिडमा, गणपति और देवो जी। ये भी ज्यादा दिन नहीं बचेंगे। शाह ने स्पष्ट किया कि सरेंडर करने वालों को छह महीने का रिहैब, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार का अवसर दिया जा रहा है, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।
भारत धर्मशाला नहीं : घुसपैठियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची से 35 लाख नाम हटे हैं जिनमें से कई घुसपैठियों के थे। घुसपैठ रोकना कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का मामला है। हमारे विरोधी वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। जबकि हम पहचान कर उन्हें बाहर निकालेंगे। भारत देश कोई धर्मशाला नहीं है।

