पटना। बिहार सरकार की वेबसाइट के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुल संपत्ति 1.65 करोड़ रुपये की है। नीतीश कुमार राजनीतिक जीवन में पारदर्शिता के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने शासन में आने के बाद 2010 में नियम बनाया था मुख्यमंत्री, मंत्री और अफसर हर साल अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे जिसका ब्योरा सरकार की वेबसाइट पर मौजूद रहेगा। अगर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री की बात करें तो इसमें सबसे ऊपर आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू है। उन्होंने अपने चुनावी हलफनामा में लगभग 931 करोड़ रुपये की संपत्ति (चल-अचल) घोषित की है। चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ कई मामलों की जांच चल रही है। वे स्किल डेवलपमेंट घोटाला में गिरफ्तार भी हुए थे।

नीतीश कुमार के साधारण जीवन शैली के बारे में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने दो महीने पहले एक कहानी बताई थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, नीतीश मुख्यमंत्री बनने के बाद किस आरामदेह पलंग पर नहीं बल्कि लकड़ी की चौकी पर सोते हैं। उनके सोने के कमरे में सिर्फ दो कुर्सियां रहती हैं वह भी प्लास्टिक की। सामान रखने के लिए एक आलमारी है। उनके पास महंगे फर्नीचर नहीं हैं। उनकी सादगी के बारे में अशोक चौधरी ने कहा था, उनके पुत्र निशांत कुमार के जन्मदिन पर भोज था। मुख्यमंत्री उनके साथ ही जमीन पर बैठे थे और पत्तल (पेड़ के पत्ते से बना प्लेट) में खाना परोसा गया। था। वे आज भी ग्रामीण परिवेश से जुड़े हुए हैं। उनकी सादगी और ईमानदारी ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है।

नीतीश कुमार की आर्थिक स्थिति जानने से पहले यह जान लेते हैं कि भारत के सबसे गरीब मुख्यमंत्री कौन हैं। अगर भारत के सबसे गरीब मुख्यमंत्री की बात की जाए तो ममता बनर्जी का नाम सबसे ऊपर है। वे भारत की सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं। एडीएआर रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास कुल 15.38 लाख रुपये की संपत्ति है। दूसरे सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं जम्मू कश्मीर के उमर अब्दुल्ला। एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास कुल 55 लाख रुपये की संपत्ति है। तीसरे सबसे गरीब मुख्यमंत्री केरल के पी विजयन हैं। उनके पास कुल 1.18 करोड़ की संपत्ति है। यानी गरीब मुख्यमंत्रियों की सूची में नीतीश कुमार मध्यक्रम में आते हैं।

नीतीश कुमार के पास दिल्ली के द्वारका में एक फ्लैट (एक हजार स्क्वायर फीट) है। लेकिन यह फ्लैट उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले 2004 में खरीदा था। वाहन के रूप में उनके पास एक फोर्ड इकोस्पोर्ट कार है। इसके अलावा 13 गाय और 10 बछड़े हैं। 2023 में उन्होंने अपनी कुल सम्पत्ति 1.64 करोड़ रुपये घोषित की थी। यानी एक साल के दौरान संपत्ति में करीब एक लाख रुपये की बढोतरी हुई। नीतीश कुमार ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो अपने कई मंत्रियों से गरीब हैं।

ईमानदारी राजनीति का मूल आधार : आर्थिक पारदर्शिता और साधारण जीवन शैली के कारण नीतीश कुमार बिहार में मिस्टर भरोसेमंद के रूप में स्थापित हुए। ईमानदारी उनकी राजनीति का सर्वश्रेष्ठ गुण है। उनके लोकप्रिय और विश्वसनीय होने का यह सबसे बड़ा कारण हैं। आज की राजनीति में किसी नेता का बेदाग होना बहुत बड़ी बात है। जैसे भारत के सबसे धनी मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तब चारा घोटाला के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। जेल भी जाना पड़ा था।

कम संपत्ति और अधिक पारदर्शिता : नीतीश कुमार कम सम्पत्ति और अधिक पारदर्शिता में विश्वास करते हैं। उन्होंने न तो कोई व्यवसाय किया है और न ही कहीं बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया है। वे साफ सुथरी छवि वाले नेता हैं। जीत-हार से जीवन में उतार- चढ़ाव आये लेकिन उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कभी उंगली नहीं उठी। उनके मंत्री और अफसर शान-शौकत में रहते हैं लेकिन वे कम खर्च में अपना साधारण जीवन गुजारते हैं।

नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार में समानता : नरेन्द्र मोदी की तरह नीतीश कुमार ने भी अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। जनसेवा ही दोनों की राजनीति का परम लक्ष्य है। दोनों के रहन-सहन, खान पान में सादगी है। दोनों ईमानदार और पारदर्शी राजनीति के पक्षधर हैं। राजनीति में दो दशक से अधिक गुजारने के बाद भी दोनों पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। इसलिए दोनों की जोड़ी राजनीति में हिट साबित हो रही है।

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