
पटना । बिहार में चुनाव प्रचार जब चरम पर था तब 31 अक्टूबर को पूरे राज्य में मौसम खराब हो गया। तमाम राजनीतिक दलों का कैंपेन रुक गया था। भारी बारिश के बीच हेलिकॉप्टर नहीं उड़ रहे थे। अधिकतर नेता दो दिनों तक घरों में सिमट कर रह गए। लेकिन सीएम नीतीश कुमार ने उन्हीं दो दिन के बीच जनता के पास जाकर 500 किलोमीटर की दूरी नाप दी।



नीतीश कुमार ने खराब मौसम के बीच ही जन संपर्क किया और लोगों से मिले। नीतीश खराब मौसम में ही करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों पर घूमे और रोड शो तक किया। मधुबनी जिले के झंझारपुर में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के घर रुक गए। उस दिन नीतीश कुमार के अलावा और कोई नेता प्रचार में नहीं निकला। ये बात पूरे बिहार में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई।
अब तक जो सवाल नीतीश कुमार की हेल्थ और सक्रियता पर उठ रहे ये वह बाजी पलट गई। राज्य में खबर फैल गई-टाइगर जिंदा है। ये टाइगर नीतीश कुमार थे। चुनाव के नतीजों के बाद नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी को शिखर पर पहुंचा दिया।
नीतीश के वोटर्स बिना किसी शर्त उनसे जुड़े रहे। यही ताकत नीतीश को हर मुसीबत से और मजबूत बनाकर निकालती रही। 2020 चुनाव में वह तीसी नंबर पर गए। मात्र 43 सीट ही जीत पाए। अब इस जीत के बाद यह लगभग तय है कि सीएम उन्हें ही बनाया जाएगा। हालंकि बीजेपी के अंदर भी सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद अपना सीएम बनाने का दबाव होगा। लेकिन जब कहा जा रहा है कि टाइगर अभी जिंदा है तो उनके दावे को कम से कम अभी खारिज करने की सियासी संभावना कम लग रही है।

