
पटना। बिहार की राजनीति इस बार जिन चेहरों को नए अंदाज में उभरते हुए देख रही है, उनमें भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं मगध-शाहाबाद क्षेत्र के चुनाव प्रभारी ऋतुराज सिन्हा सबसे प्रमुख हैं। संगठनात्मक जमीन पर उनकी पकड़, विरोधियों की चालों को पहले ही भांप लेने की क्षमता और शांत स्वभाव में छिपी तेज राजनीतिक समझ इन सबने उन्हें इस पूरे इलाके में भाजपा का बड़ा रणनीतिकार बनाकर सामने ला दिया है। दोनों क्षेत्र में स्पष्ट तौर पर भाजपा की 40 सीटों प्रचंड विजय के रणनीति के नए शिल्पकार बन ऋतुराज सिन्हा उभरे हैं। सीधे कहें तो महागठबंधन के सबसे मजबूत किले को भेद कर उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी।



शाहाबाद हो या मगध, दोनों ही क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद एनडीए के लिए जटिल माने जा रहे थे। ज्ञात हो कि इन क्षेत्रों में पिछले बार के चुनाव में एनडीए के मात्र 8 विधायक जीत पाए थे और जदयू का तो खाता भी नहीं खुल पाया था। जातीय संतुलन, स्थानीय समीकरण, पुराने गुटों का प्रभाव एवं नए मतदाताओं का तेज बदलाव यहां चुनावी रणनीति बनाना किसी परीक्षा से कम नहीं होता, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने ऋतुराज सिन्हा पर भरोसा जताया। उन्होंने जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत, लगातार फीडबैक और डेटा-आधारित रणनीति से साबित किया। संगठन के भीतर यह माना जाता है कि ऋतुराज सिन्हा की सबसे बड़ी ताकत उनकी सूक्ष्म प्रबंधन क्षमता है। वे केवल नेताओं से ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद रखते हैं। 48 सीटों पर ऋतुराज की सभाओं, संवादों और कोर-ग्रुप बैठकों में उनकी उपस्थिति ने एक संदेश दिया कि लड़ाई सिर्फ टिकट देने तक नहीं, बल्कि हर सीट को जीतने की रणनीति बनायी।

