
रांची। हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा पल आता है, जब उसे लगता है कि वह खुद को साबित कर सकता है, चाहे हालात जैसे भी हों। नैयर इकबाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिनका सफर ₹5000 से शुरू होकर 22 करोड़ रुपए तक पहुंचा। यह आंकड़ा तो सिर्फ एक साधारण आंकड़ा है, लेकिन इसे हासिल करने में जो संघर्ष और कड़ी मेहनत रही, वह एक प्रेरणादायक कहानी है। उनका जीवन एक फिल्म की कहानी जैसा ही रोमांचक, संघर्षपूर्ण और अंततः सफल रहा।




- संघर्ष की शुरुआत
नैयर इकबाल मध्यम वर्गीयथा परिवार से थे और उनके पिता जौब में थे। उनके पिता टाटा स्टील में काम करते थे, जबकि उनकी मां गृहिणी थीं। ऐसे माहौल में उन्हें कभी कोई बड़ा सहारा नहीं मिला, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। नैयर ने अपनी शिक्षा बोकारो से पूरी की, जहां वह प्लस टू तक पढ़े। इसके बाद, उनके पास आगे की पढ़ाई के लिए ज्यादा विकल्प नहीं थे, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति मजबूत थी। उन्होंने अपनी पहली नौकरी वोल्टास कंपनी में टेक्नीशियन के रूप में शुरू की, जहां उन्हें पहले दिन से ही कड़ी मेहनत करनी पड़ी। शुरुआती दिन मुश्किल थे, लेकिन नैयर ने खुद को साबित किया और कम समय में ही सुपरवाइजर बनने में सफल रहे।
- डिग्री की कमी और बिजनेस की सलाह
हालांकि, एक बात उनके सामने खड़ी थी—उनके पास कोई डिग्री नहीं थी, और इसका असर उनके करियर की ऊंचाइयों तक पहुंचने में पड़ रहा था। उनका सपना था कि वह किसी बड़े पद पर पहुंचे, लेकिन डिग्री की कमी आड़े आ रही थी। इसी दौरान, किसी ने उन्हें एक सलाह दी जो उनके जीवन का मोड़ बन गई। उस व्यक्ति ने कहा, “डिग्री क्या चीज होती है? अपना खुद का बिजनेस शुरू करो, तुम एमडी और चेयरमैन भी बन सकते हो।” इस सलाह ने नैयर की सोच को पूरी तरह से बदल दिया। वह इस सलाह पर विचार करने लगे और बिजनेस की दिशा में कदम बढ़ाने का विचार करने लगे।
- गल्फ और यूरोप का सपना, लेकिन किस्मत ने बदल दिया रास्ता
सोनू के मन में इस समय एक और सपना था—गल्फ देशों में जाकर वहां काम करने का और फिर यूरोप में अपनी जिंदगी बसाने का। वह सोचते थे कि एक बार गल्फ जाकर वहां एक स्थिर जीवन मिल जाएगा। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। जैसा कि होता है, जब हम किसी एक रास्ते पर चलते हैं, तो जीवन हमें किसी और दिशा में ले जाता है। नैयर के जीवन में भी ऐसा ही हुआ। एक दिन वह गल्फ जाने के लिए इंटरव्यू देने गए, जहां एक पाकिस्तानी ऑफिसर ने उनका इंटरव्यू लिया। इस ऑफिसर ने कहा, “तुम्हारे पास शिक्षा कम हो सकती है, लेकिन तुम्हारा विजन बहुत बड़ा है, और तुम्हारी सोच बहुत ऊंची है।” इस एक वाक्य ने नैयर की सोच को और भी ऊंचा कर दिया, और यहीं से उनके
बिजनेस के सफर की शुरुआत हुई। - पहले दिन से संघर्ष
नैयर ने 5000 रुपए से अपने बिजनेस की शुरुआत की थी, और उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में वह बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में स्कूटर और बाइक से दौड़ते हुए अपने काम की शुरुआत करते थे। वह शहर के कोने-कोने में जाकर अपने व्यापार को फैलाने की कोशिश करते थे। मुश्किलें आईं, लेकिन नैयर का आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। यही उनका असली हथियार था—कड़ी मेहनत और सही दिशा में दृढ़ संकल्प। - इंटरव्यू बना महत्वपूर्ण मोड़
जब वह गल्फ जाने का इंटरव्यू दे रहे थे, तो इस इंटरव्यू ने उनकी जिंदगी की दिशा पूरी तरह से बदल दी। पाकिस्तानी ऑफिसर ने उनके बारे में जो कहा था, वह शब्द उनके दिल में बस गए थे। यही वह पल था जब नैयर ने यह महसूस किया कि उनका असली रास्ता बिजनेस ही है। उन्होंने जल्द ही अपनी सारी योजनाएं बदल दीं और बिजनेस की दिशा में कदम बढ़ाए। - सर्विस से सेल्स में सफलता
एक दिन, उन्हें सर्विस से सेल्स डिपार्टमेंट में भेजा गया। यह उनके लिए एक और चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में लिया। उन्होंने झारखंड के हर कोने में अपनी कंपनी का झंडा गाड़ दिया। उनका काम इतना बेहतरीन था कि उन्हें Eastern Zone में Best Seller Award मिला। यह अवार्ड उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रतीक था। यह साबित हो गया कि उनके पास न सिर्फ विजन था, बल्कि काम को समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ करने की क्षमता भी थी। - बड़ी डील्स और सफलता के सिलसिले
उनकी पहली बड़ी डील कैपिटल हिल के साथ हुई। इसके बाद, उन्होंने राज हॉस्पिटल, सीएमपीडीआई, रामप्यारी, मेदांता (जो आज अपोलो के नाम से जाना जाता है), और सेंट्रल जैसे बड़े नामों के साथ व्यापार किया। हर एक डील उनके लिए एक नई सफलता थी और यह उनकी मेहनत का फल था। उनका मानना था कि काम समय से पहले, कम बजट में, और उच्च गुणवत्ता के साथ होना चाहिए। यही कारण था कि लोग उनके काम की गुणवत्ता से प्रभावित होते थे और उनके साथ जुड़ने के लिए आगे आते थे। - काम की गुणवत्ता और समय पर पूरा करने की सोच
नैयर का मानना था कि जब आप काम करते हैं, तो उसे समय से पहले, कम बजट में और पूरी गुणवत्ता के साथ करना चाहिए। यह सिद्धांत उनके बिजनेस का आधार बन गया। यही कारण था कि जब वह किसी प्रोजेक्ट को लेते, तो उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर खुद ध्यान देते थे। उनका यह तरीका उन्हें हर बार सफलता की ओर ले जाता था। - शौक और परिवार
नैयर को प्रीमियम कपड़े, ब्रांडेड शूज़ और गाड़ियों का बहुत शौक था। उनके जीवन में यह चीजें सिर्फ दिखावा नहीं थीं, बल्कि उनका यह शौक उन्हें अपने काम में परफेक्शन की ओर प्रेरित करता था। 2016 में उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब अतिया जमाल उनकी जीवनसंगिनी बनीं। इसके बाद, उनके घर में नुवैद, आदिल और माज के रूप में तीन प्यारे बेटों का आगमन हुआ। यह पल उनके जीवन का सबसे खुशनुमा और अविस्मरणीय मोड़ था।
निष्कर्ष
इस तरह हम देखते हैँ कि
नैयर इकबाल की यात्रा ने यह साबित कर दिया कि अगर किसी व्यक्ति के पास दृढ़ इच्छाशक्ति, सही दिशा में मेहनत और एक विजन हो, तो कोई भी सपना सच हो सकता है। ₹5000 से शुरू होकर 22 करोड़ तक का सफर उनका संघर्ष, समर्पण और सच्ची मेहनत की मिसाल है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर हम अपने सपनों को सच्ची मेहनत और लगन से पीछा करें, तो हम किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं।

