रामगढ़। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मां के योगदान और उनके अटूट साथ को भावुक शब्दों में बयां किया। उन्होंने कहा कि गांव की पगडंडियों, खेतों और जल-जंगल के बीच बाबा ने संघर्ष की शुरुआत की थी। उस कठिन सफर में मां हर कदम पर उनकी हमसफर बनकर साथ चलती रहीं।

मुख्यमंत्री के इस कथन में संघर्ष के साथ-साथ परिवार के त्याग, समर्पण और आपसी विश्वास की झलक दिखाई देती है। उन्होंने मां को केवल पिता की जीवनसंगिनी के रूप में नहीं, बल्कि संघर्ष के हर मोड़ पर हौसला देने वाली सबसे बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया।

हेमंत सोरेन के अनुसार, बाबा दिशोम गुरू शिबू सोरेन ने जब-जब संघर्ष का रास्ता चुना, मां रूपी सोरेन ने हर मुश्किल में उनका हाथ थामे रखा। कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच उनका साथ बाबा के लिए संबल बना रहा। संघर्ष की राह में मां की भूमिका केवल साथ निभाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने हर कठिन घड़ी में उनका मनोबल बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री के इन शब्दों से यह संदेश उभरता है कि किसी भी बड़े संघर्ष के पीछे अक्सर परिवार का मौन त्याग और समर्पण छिपा होता है। जीवन की कठिन राहों पर जब परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होती हैं, तब अपनों का विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति बनता है।

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