
रांची। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य घोटाले में बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितता की अब परत-दर-परत खुल रही है। राज्य सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव ओमप्रकाश सिंह समेत 21 लोगों के ठिकाने पर ईडी की छापेमारी इस आशय के प्रमाण मिले हैं कि घोटालेबाजों ने 40 करोड़ से अधिक के फर्जी बिल बनाए। इसका भुगतान अभी लंबित हैं। जांच के दायरे में राज्य के 220 से अधिक के अस्पताल शामिल हैं। जिनपर शिकंजा कस सकता है।



अमानवीय यह है कि कोरोना आपदा को घोटालेबाजों ने अवसर बनाया और इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर पैसे की हेराफेरी की। घोटालेबाजों के ठिकानों से ईडी को नकदी के साथ-साथ घोटाले के संबंध में प्रमाण भी हाथ लगे हैं, जो आगे की जांच में और अधिक मददगार साबित होंगे।
ईडी ने झारखंड समेत दिल्ली और बंगाल में घोटाले से जुड़े लोगों के ठिकाने पर छापेमारी की थी। इस पूरे घोटाले की मास्टर माइंड बन्ना गुप्ता के निजी सचिव रहे ओमप्रकाश सिंह को बताया जाता है। विभिन्न अस्पतालों से भी छापेमारी के दौरान ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिससे अनियमितता की पुष्टि हो रही है। उल्लेखनीय है कि सीएजी की रिपोर्ट में इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
जानकारी सामने आई थी कि बड़े पैमाने पर आपसी मिलीभगत से फर्जी तरीके से इलाज हुआ। जिन मरीजों को मृत करा देकर बिल का भुगतान लिया गया, बाद में उनके नाम पर भी उपचार हुआ। ईडी के सूत्रों के मुताबिक छानबीन के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। इस घोटाले को लेकर कार्रवाई की जद में कई और लोग आ सकते हैं।

