नई दिल्ली । भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर दूसरे चरण के दीर्घकालिक पूवार्नुमान में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की चेतावनी दी। मौसम विभाग के अनुसार, जून में लू चलने और भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान है। दिल्ली स्थित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन और आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में मौसम के पूवार्नुमानों को साझा किया।सचिव ने बताया कि जून से सितंबर 2026 के दौरान देश में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालीन औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके अलावा, सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे अधिक यानी 84 प्रतिशत है जबकि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में मानसून के दौरान औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कम वर्षा के कारण खेती, जल संकट और भीषण गर्मी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।रविचंद्रन के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी प्रायद्वीपीय इलाकों और पूर्वी-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है।सचिव के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 46 प्रतिशत, मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 43 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी कम बारिश की संभावना 45 प्रतिशत, पूर्वोत्तर भारत में सामान्य और सामान्य से कम बारिश की संभावना, मानसून कोर जोन (एमसीजेड) में भी कम बारिश की संभावना अधिक है। इसके अलावा, जून 2026 में देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है। केवल उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना है।उन्होंने कहा कि कम बारिश का असर खेती, जलाशयों, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे सूखे और गर्मी की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि जून 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। इसके साथ ही कई राज्यों में लू के दिन भी बढ़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में लू का खतरा ज्यादा है। हालांकि राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू पड़ने की संभावना है।उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित होने के आसार हैं। आमतौर पर अल नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ता है। वहीं हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) फिलहाल तटस्थ स्थिति में बना हुआ है। सचिव ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को गर्मी और जल संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीएं और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

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