रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत में गुमला की वर्ष 2020 से लापता छह साल की बच्ची से जुड़े मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह दूसरे राज्यों से झारखंड आने वाले व्यक्तियों की पहचान और निगरानी के लिए उचित दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) तैयार करे।

कोर्ट ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोगों के उचित सत्यापन और संबंधित थानों से अनुमति प्राप्त करने के संबंध में नियम बनाया जाए। अदालत ने मौखिक रूप कहा कि राज्य में राजस्थान एवं अन्य राज्यों से आने वाले घुमंतू लोगों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। पुलिस ऐसे लोगों का आधार कार्ड या अन्य पहचान की जांच नहीं करती है। अदालत ने गृह सचिव को अगली सुनवाई के दौरान आनलाइन माध्यम से उपस्थित रहने और इस समस्या से निपटने के लिए सुझाव देने को कहा है।

मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। अदालत ने कहा कि ऐसे लोग जगह-जगह टेंट बनाकर रहते हैं और कई बार आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल रहते हैं। ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए पुलिस प्रशासन को गाइडलाइन बनाने की जरूरत है। अदालत ने सुनवाई के दौरान हाल ही में रांची के धुर्वा से गायब हुए दो बच्चों अंश और अंशिका का जिक्र भी किया। कोर्ट ने कहा कि झारखंड में बच्चों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है, जिन पर कड़ी नजर रखनी होगी। यह रैकेट अन्य राज्यों से आने वाले लोगों का है, जो व्यापार के बहाने झारखंड आते हैं और मानव तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं। अदालत ने कहा कि बाल तस्करी के शिकार बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है और यह सामाजिक संरचना को भी कमजोर करती है।

यह मामला गुमला जिले की छह वर्षीय बच्ची से जुड़ा है, जिसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने हेवियस कार्पस दाखिल की है। अदालत मामले में पुलिस की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई है।

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