
पटना। राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लागू करने की स्वीकृति मिल गई है। यह योजना खरीफ 2018 से लागू बिहार राज्य फसल सहायता योजना का स्थान लेगी। नई योजना के लागू होने से बीमित किसानों को कृषि लागत के समतुल्य फसल क्षति का भुगतान मिल सकेगा। इसके साथ ही बीमित भूमि की कोई अधिकतम सीमा नहीं होने से बड़े जोत वाले किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पीएम फसल बीमा योजना लागू करने के साथ कुल 25 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी। राज्य सरकार ने गांव से शहरों तक भूमि मापी शुल्क भी दोगुना कर दिया है। संशोधित व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा। पहले यह शहरी क्षेत्र में प्रति खेसरा एक हजार और अधिकतम चार हजार रुपये था। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि मापी शुल्क शुल्क प्रति खेसरा एक हजार रुपये तथा अधिकतम चार हजार रुपये कर दिया गया है। पहले यह प्रति खेसरा 500 रुपये और अधिकतम दो हजार रुपये था।
तत्काल मापी के लिए शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा चार हजार रुपये तथा अधिकतम 16 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा। भूखंडों की मापी के लिए आॅनलाइन माध्यम से आवेदन किया जाता है, जिसके आधार पर अचंल कार्यालय सशुल्क मापी कराता है।
तीन माह की पेंशन के लिए 3662 करोड़ रुपये स्वीकृत: मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को इस साल मई, जून और जुलाई की पेंशन राशि के भुगतान के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 3,662 करोड़ रुपये अग्रिम स्वीकृत करने का भी निर्णय लिया है। राज्य सरकार की ओर से संचालित छह सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्तता पेंशन योजना, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, बिहार नि:शक्तता पेंशन योजना और मुख्मयंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के लाभार्थियों के बीच इसका भुगतान किया जाएगा। इसके तहत लाभार्थियों को प्रतिमाह 1,100 रुपये की पेंशन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से दी जाती है। सरकार ने प्रत्येक माह की 10 तारीख को पेंशन भुगतान सुनिश्चित करने का फैसला किया है।
एक जुलाई से लागू होगी जी राम जी योजना: ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-जी राम जी योजना, बिहार-2026 को भी स्वीकृति दी है। यह योजना एक जुलाई 2026 से राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की विस्तारित मजदूरी रोजगार गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आजीविका सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय, सहरसा में एसटीपी-जलापूर्ति के लिए 736 करोड़: नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत केंद्र प्रायोजित अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के अंतर्गत बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा में जलापूर्ति एवं सीवरेज परियोजनाओं (एसटीपी) के लिए कुल 736 करोड़ रुपये खर्च करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। बिहारशरीफ एसटीपी की लागत 101 करोड़ 63 लाख, बेगूसराय एसटीपी की लागत 375 करोड़ 86 लाख, हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना की लागत 131 करोड़ 88 लाख तथा सहरसा जलापूर्ति योजना की लागत 127 करोड़ 45 लाख है।

