बेंगलुरु। दक्षिण भारत की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था की ओर से रविवार को झारखंड की कवयित्री जसिन्ता केरकेट्टा को एक लाख रुपये का प्रतिष्ठित अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान बेंगलुरु में आयोजित संस्था के 28वें वार्षिकोत्सव-सह-पुरस्कार अर्पण समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर दक्षिण भारत में हिन्दी की सेवा के लिए 25 हजार रुपये का दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं बेंगलुरु विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त प्रो. टीजी प्रभाशंकर प्रेमी को दिया गया। सम्मान के रूप में नकद राशि के अलावा अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति फलक एवं श्रीफल भी भेंट किए गए।

अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान ग्रहण करते हुए झारखंड की कवयित्री केरकेट्टा ने कहा कि रचनाकार में और खास तौर पर स्त्री रचनाकार में अपने लोक की समझ और अस्मिता का बोध एवं अभिमान का भाव होना बहुत जरूरी है। शब्द संस्था ने अपना प्रतिष्ठित अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान मुझे प्रदान कर आदिवासी अस्मिता और हाशिये की कविता को सम्मानित किया है।

शिक्षाविद डॉ टीजी प्रभाशंकर प्रेमी ने दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान ग्रहण करते हुए कहा कि संस्कृतियों के टकराव के आज के दौर में प्रेम और पारस्परिकता का विकास करना नया नागरिक धर्म हो गया है। भाषा में संस्कृति बोलती और अभिरक्षित रहती है, इसलिए हर वक्ता समाज अपनी भाषा के प्रति संवेदनशील होता है, लेकिन ध्यान रहे कि भारत की बहुभाषिकता विविधता में एकता को संबल देती है।

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