रांची। झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का रास्ता अब साफ हो गया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की ओर से भेजे गए सूचना आयुक्तों के पैनल को अपनी मंजूरी दी। लोक भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इन नियुक्तियों पर कुछ शर्तों के साथ सहमति प्रदान की गई हैं। उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि झारखण्ड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोग का कार्य सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर विचार करते हुए उन्होंने अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो तथा शिवपूजन पाठक की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान की है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब आयोग में लंबे समय से पद रिक्त रहने के कारण कार्यों के निष्पादन में दिक्कत आ रही थी। राज्यपाल द्वारा दी गई इस स्वीकृति से आयोग के लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

जल्द करें मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति : हालांकि राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को कुछ शर्तों के साथ अनुमोदित किया है। उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि झारखंड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोग का कार्य सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटि सामने आती है या इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़ा कोई प्रश्न उठता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

राज्यपाल के प्रधान सचिव नितिन कुलकर्णी ने इस संबंध में राज्य सरकार को आधिकारिक रूप से सूचना दे दी है। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अब कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद चारों अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर औपचारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के कई पद लंबे समय से रिक्त थे। इसके कारण सूचना के अधिकार (आरटीआई) से जुड़े मामलों के निपटारे में देरी की स्थिति बन रही थी। कई अपील और शिकायतें लंबित पड़ी थीं, जिससे आयोग के कामकाज पर भी असर पड़ रहा था। ऐसे में नई नियुक्तियों को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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