रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को पटना के एक गुप्त ठिकाने पर ले जाकर तीन अलग-अलग प्रश्नपत्रों के कुल 370 सवालों के जवाब महज तीन घंटे में रटवाए गए थे। आरोप है कि इसके बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्रों और उत्तरों के सेट को जला दिया गया।

पटना में जुटाए गए थे अभ्यर्थी

एसआईटी की जांच के मुताबिक, इस कथित रैकेट का संचालन पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और अन्य बिचौलियों के माध्यम से किया जा रहा था। मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है।

जांच में सामने आया कि 20 सितंबर 2024 को विभिन्न स्थानों से अभ्यर्थियों को पटना बुलाया गया था। इसके बाद उन्हें गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के आसपास समूहों में एकत्र किया गया और फिर एक सुरक्षित मकान में ले जाया गया। यहां अभ्यर्थियों को तीन अलग-अलग प्रश्नपत्रों के उत्तर के सेट उपलब्ध कराए गए। उन्हें इन उत्तरों को याद करने के लिए लगभग तीन घंटे का समय दिया गया था।

प्रश्नपत्र जलाने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, उत्तर याद कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्रों और उत्तरों के सेट को जला दिया गया, ताकि मामले से जुड़े सबूत नष्ट किए जा सकें। इसके बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग समूहों में परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया।

एसआईटी की जांच में अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तम कुमार, त्रिभुवन यादव, राम कृष्ण कुमार सिंह और अमित कुमार समेत कई अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। इन अभ्यर्थियों पर कथित तौर पर इस नेटवर्क से लाभ लेने का आरोप है।

तीन लाख रुपये के लेनदेन की भी जांच

जांच में वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम तथ्य भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में आरोपी संजय कुमार के बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा, अन्य लोगों की ओर से नकद भुगतान किए जाने के साक्ष्य मिलने की बात भी कही गई है।

चयन का भरोसा देकर लिए गए थे प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक

एसआईटी के अनुसार, गिरोह ने अभ्यर्थियों से पूरी रकम परिणाम घोषित होने से पहले नहीं ली थी। कथित तौर पर चयन की गारंटी देने के नाम पर उनसे शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक लिए गए थे। योजना के तहत परिणाम आने के बाद अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की रणनीति अपनाई गई थी।

फिलहाल एसआईटी इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, अन्य संभावित आरोपियों, बिचौलियों और अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

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