
जमशेदपुर। विधायक सरयू राय ने शनिवार को कहा कि धनबाद में कोयला माफिया पर अंकुश लगाना ईडी के बूते की बात नहीं है। ईडी धनबाद कोयला माफिया की कतिपय आर्थिक अनियमितताओं पर कार्रवाई कर सकती है, काला धन जब्त कर सकती है, अनियमितताओं के प्रमाण एकत्र कर सकती है, कुछ हद तक मनी लांड्रिंग (धन शोधन) का पर्दाफाश कर सकती है, पर राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कोयला माफिया को मिल रहे खुला प्रशासनिक संरक्षण पर कारवाई कर अकेले इनके भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार करना ईडी के लिए संभव नहीं है। इसके लिए ईडी के साथ साथ केन्द्र और राज्य सरकारों की प्रशासनिक इकाइयों को भी अवैध खनन क्षेत्र में एसआईटी गठन कर उतरना होगा।
सरयू राय ने कहा कि धनबाद का कोयला माफिया तंत्र की सीधी पहुंच केन्द्र और राज्य सरकार की प्रभावशाली व्यवस्था तंत्र तक है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार से जुड़े राजनीतिक पदधारी कोयला माफिया की गतिविधियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। धनबाद जिला प्रशासन तो इनकी मुट्ठी में है। झारखंड सरकार के सचिवालय तक को ये सीधे प्रभावित करते हैं। विधानसभा में उठाए जाने वाले सवालों और दिये गये प्रमाणों पर विभागों के उत्तर कोयला माफिया के हितों की रक्षा करने वाले होते हैं। जिन कोयला माफिया किरदारों के ठिकानों पर धनबाद में ईडी छापामारी कर अवैध गतिविधियों के प्रमाण इकट्ठा करती है, काला धन जब्त करती है, वे खुलेआम पूरा पेज का विज्ञापन जारी कर कतिपय राजनीतिक दलों से संबंध जोड़ते हैं। इतना ही नहीं, वे उनके टिकट पर चुनाव लड़ने की घोषणा भी करते हैं।
राय ने कहा कि बीसीसीएल केन्द्र सरकार का लोक उपक्रम है। इसके वरीय अधिकारियों की मिलीभगत कोयला माफिया के साथ है। कोयला माफिया संरक्षक राजनीतिक आकाओं की बीसीसीएल मुरीद है। उन्होंने कहा कि कोयला माफिया को नेस्तनाबूद करने के लिए ईडी के साथ साथ केन्द्र और राज्य सरकारों की प्रशासनिक इकाइयों को भी अवैध खनन क्षेत्र में एसआईटी गठन कर उतरना होगा। तभी इन पर नकेल कसी जा सकेगी।
