
पटना। बिहार की नई सरकार के एजेंडा में औद्योगिक इकाईयों की स्थापना को अधिक महत्व दिया जाना है। यह मामला सीधे-सीधे रोजगार से जुड़ा है। न्यू एज इंडस्ट्री के तहत सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना पर विशेष जोर है। पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित एआई समिट पर उद्योग विभाग ने इस क्षेत्र की कई कंपनियों से बात की थी। अब इस क्षेत्र की कंपनियों को राज्य सरकार से मिलने वाली सहूलियतों को संबंधित सेक्टर की कंपनियों तक पहुंचाने की कवायद नए सिरे से आरंभ होनी है।
यह बताया गया कि राज्य सरकार ने यह नीतिगत प्राविधान किया हुआ है कि सेमीकंडक्टर यूनिटों को भी 100 करोड़ के प्रोजेक्ट पर एक एकड़ जमीन मात्र एक रुपए की टोकन राशि में दी जाएगी। स्टांप ड्यूटी व निबंधन शुल्क भी नहीं लगेगा। उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बौद्धिक संपदा के निर्माण और संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार पात्र इकाईयों को पेटेंट संबंधित प्रोत्साहन प्रदान करेगी। भारत में पेटेंट फाइल करने और रख-रखाव पर लगने वाली लागत की 75 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति (फी्रेु४१२ीेील्ल३) की जाएगी।
विदेशी पेटेंटके आवेदन पर भी लगने वाले लागत की 75 प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी। यह संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और चीन सहित प्रमुख वैश्विक क्षेत्राधिकारों में दायर पेटेंट आवेदनों पर लागू होगा।
ट्रेनिंग खर्चों का पूरा पैसा वापस : सेमिकंडक्टर के क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और कुशल कार्यबल के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार सरकार पात्र यूनिटों द्वारा किए गए प्रशिक्षण खर्चों की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति प्रदान करेगी। ऐसी प्रतिपूर्ति केवल उन कर्मचारियों के संबंथ में स्वीकार्य होगी, जो बिहार के रहने वाले हैं। सेमिकंडक्टर यूनिटों को रियायती दर पर अनुपचारित जल की आपूर्ति की जाएगी। बिजली शुल्क में भी सब्सिडी दी जाएगी।

