नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में आपातकाल की 50वीं बरसी पर उसके काले अध्याय को याद किया और कहा कि यह सिर्फ संविधान की हत्या नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका को भी गुलाम बनाने का प्रयास था। उन्होंने उन हजारों लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अत्याचारों का सामना करते हुए लोकतंत्र की रक्षा की।

प्रधानमंत्री ने 123वें एपिसोड में अनेक विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने हाल के दिनों में देश में हुए सकारात्मक बदलावों, सांस्कृतिक पर्वों, सामाजिक सहभागिता, महिलाओं की प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और भारत की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देशवासियों को गर्व और प्रेरणा का अनुभव कराया। प्रधानमंत्री ने आपातकाल की 50वीं बरसी पर लोकतंत्र की रक्षा में जुटे लोगों को याद किया। मोदी ने कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया। आप कल्पना कर सकते हैं कि वह दौर कैसा था। आपातकाल लगाने वालों ने ना सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी गुलाम बनाए रखने का था। इस दौरान लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया था। इसके ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, बाबू जगजीवन राम और अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने आॅडियो भी साझा किए, जिनमें उन्होंने उस दौर की भयावहता को स्पष्ट किया।

जॉर्ज फर्नांडिस को जंजीरों में बांधा गया था : उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडिस साहब को जंजीरों में बांधा गया था। अनेक लोगों को कठोर यातनाएं दी गई। मीसा के तहत किसी को भी ऐसे ही गिरफ्तार कर लिया जाता था। छात्रों को भी परेशान किया गया। अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उस दौर में जो हजारों लोग गिरफ्तार किए गए उन पर ऐसे ही अमानवीय अत्याचार हुए लेकिन यह भारत की जनता का सामर्थ्य है कि वो झुकी नहीं, टूटी नहीं और लोकतंत्र के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया। आखिरकार, जनता-जनार्दन की जीत हुई-आपातकाल हटा लिया गया और आपातकाल थोपने वाले हार गए। मोदी ने कहा कि यह भारत की जनता का सामर्थ्य था कि वो झुकी नहीं, टूटी नहीं और लोकतंत्र के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया।

25 जून को लागू किए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार द्वारा इसे संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया गया। मोदी ने कहा कि देश पर आपातकाल थोपे जाने के 50 वर्ष कुछ दिन पहले ही पूरे हुए हैं। हम देशवासियों ने संविधान हत्या दिवस’ मनाया है। हमें हमेशा उन सभी लोगों को याद करना चाहिए, जिन्होंने आपातकाल का डट कर मुकाबला किया था। इससे हमें अपने संविधान को सशक्त बनाए रखने के लिए निरंतर सजग रहने की प्रेरणा मिलती है।

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की भव्यता का वर्णन करते हुए बताया कि इस बार योग दिवस पर तीन लाख लोगों ने विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर एक साथ योग किया। दो हजार से अधिक आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक सूर्य नमस्कार किए। दिल्ली में यमुना के किनारे योग को स्वच्छता के संकल्प से जोड़ा गया। हिमालय की बफीर्ली चोटियों से लेकर नौसेना के जहाजों तक, योग हर जगह हुआ। इस बार की थीम ह्यएक धरती, एक स्वास्थ्यह्ण को उन्होंने वैश्विक एकता और भारतीय संस्कृति का सन्देश बताया।

प्रधानमंत्री ने तीर्थ यात्राओं में सेवा की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब लोग तीर्थ पर निकलते हैं, तो हजारों लोग सेवा में लग जाते हैं — भोजन, पानी, चिकित्सा और आश्रय जैसी व्यवस्थाएं भाव से की जाती हैं। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने और अमरनाथ यात्रा, जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे आयोजनों की चर्चा की और सेवा भाव से जुड़े लोगों की सराहना की। उन्होंने देश को ट्रेकोमा रोग से मुक्त घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और बताया कि यह उपलब्धि स्वच्छता, जल की आपूर्ति और स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत से संभव हुई है। उन्होंने बताया कि अब देश की लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या को किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा है, जो 2015 से पहले सिर्फ 25 करोड़ लोगों तक सीमित था।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष में हाल की सफलता की ओर संकेत किया और कहा कि भारत हर क्षेत्र में नया इतिहास रच रहा है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी उत्पादों के समर्थन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार दोहराते हुए देशवासियों से सकारात्मक योगदान की अपील की।

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