नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2040 में कोई भारतीय चंद्रमा की सतह से “विकसित भारत 2047” की घोषणा करेगा। वो घोषणा पूरे ब्रह्मांड में भारत की विश्व पटल पर मजबूती की पुष्टि करेगा। भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल रॉकेट और उपग्रहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों को सशक्त बनाने, जीवन को बेहतर बनाने और एक उज्ज्वल भविष्य गढ़ने का माध्यम भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस इस बात की याद दिलाता है कि अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियां बहुत विशाल है। विज्ञान, नवाचार और जनकल्याण मिलकर राष्ट्र का भविष्य निर्मित कर कर रहे हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने गगनयान मिशन की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि चार वायुसेना अधिकारी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन प्रसन्नथ बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप इस ऐतिहासिक मिशन के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में शासन में स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग का आह्वान किया था और 2015 में इसके लिए स्पष्ट दृष्टि तैयार की गई थी। दस वर्षों बाद, सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्र दोनों की क्षमताओं में व्यापक वृद्धि हुई है। 300 से अधिक इंटरैक्शन और 90 से ज्यादा दस्तावेजों के आधार पर तैयार 15 वर्षीय रोडमैप में 100 से अधिक उपग्रहों का प्रक्षेपण शामिल है, जिनमें से 70 प्रतिशत छोटे उपग्रह होंगे। इनमें सरकारी तकनीकी मिशनों के साथ-साथ निजी क्षेत्र द्वारा संचालित परिचालन मिशन भी शामिल होंगे।

यह रोडमैप भारत की अंतरिक्ष यात्रा को 2040 और आगे तक दिशा देगा तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए खाद्य और जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय सततता और समावेशी विकास में योगदान करेगा।

कार्यक्रम में डॉ. सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन 2025 और आईएसआरओ रोबोटिक्स चैलेंज – यूआरएससी 2025 के विजेताओं को भी सम्मानित किया।

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