
रांची। भारतीय प्रशासनिक सेवा की 1988 बैच की अधिकारी अलका तिवारी झारखंड की नई मुख्य सचिव होंगी। राजस्व पर्षद की सदस्य अलका तिवारी को मुख्य सचिव बनाने का लेकर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग की ओर से शुक्रवार 1 नवंबर को अधिसूचना जारी कर दी गई। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अलका तिवारी की नियुक्ति को लेकर सहमति प्रदान की गई है।



मुख्य सचिव एल.खियांग्ते के 31 अक्टूबर को रिटायर होने के बाद अलका तिवारी को ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। आईएएस अलका तिवारी केंद्रीय प्रतिनिुयक्ति से मुक्त होने के बाद वापस झारखंड आईं हैं। वर्तमान अपर मुख्य सचिव में सबसे वरीय होने के कारण अलका तिवारी को ये जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। 1988 बैच की आईएएस अधिकारी अलका तिवारी को 15 अक्टूबर को ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से विमुक्त किया गया था।
नवनियुक्त मुख्य सचिव अलका तिवरी केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा जनजाति आयोग के सचिव के रूप में भी काम कर चुकी हैं। अलका तिवारी 30 सितंबर 2025 को रिटायर होंगी, ऐसे में वो भी करीब 11 महीने तक मुख्य सचिव के पद पर काम कर सकती हैं।
इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान एल. खियांग्ते को तीन महीने का एक्सटेंशन देने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन इस पर कोई आदेश नहीं आया। वहीं आईएएस एल. खियांग्ते 31 अक्टूबर को रिटायर हो गए। उन्हांेने लगभग 11 महीने तक मुख्य सचिव का पदभार संभाला किया।
बेदाग ईमानदार छवि के रूप में अलका तिवारी की पहचान : अलका तिवारी झारखंड राज्य में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और बेदाग ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनकी सरलता, सादगी, कार्यकुशलता और कड़ी मेहनत के लिए बहुत सम्मान दिया जाता है। उन्हें आईएएस अधिकारी के लिए एक आदर्श माना जाता है।
मेरठ विश्वविद्यालय की टॉपर रहीं और यूएसए से डिग्री : अलका तिवारी मेरठ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और उन्हें टॉपर होने के लिए राज्यपाल का स्वर्ण पदक मिला है। उन्होंने मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, यू.के. के सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग से एम.एससी. किया, ‘विकास परियोजनाओं के प्रबंधन और कार्यान्वयन’ में पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक प्राप्त किया। वह रांची विश्वविद्यालय से कानून स्नातक भी हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय, यूएसए से ‘वित्तीय समावेशन पर पुनर्विचार’ पर एक अल्पकालिक पाठ्यक्रम और ड्यूक विश्वविद्यालय, यूएसए से ‘वित्तीय सलाहकारों के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन’ पर एक और विशेष पाठ्यक्रम पूरा किया है।

