रांची। भूमि सर्वेक्षण (लैंड सर्वे) कार्य में देरी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत ने निर्धारित समय सीमा के बावजूद सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई।मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 25 जून तक शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि राज्य के सभी जिलों में लैंड सर्वे कब तक पूरा किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। अदालत ने 17 जून 2025 को राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को चार सप्ताह में नई तकनीक अपनाने और छह माह के भीतर पूरे राज्य में सर्वेक्षण कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में लैंड सर्वे के लिए अपनाई जा रही तकनीक पुरानी है, जिसके कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में उपयोग हो रही आधुनिक तकनीकों का अध्ययन किया जा रहा है और उनके आधार पर राज्य में सर्वे प्रक्रिया को बेहतर बनाने की योजना है।

इससे पहले की सुनवाई में यह भी बताया गया था कि तीन अलग-अलग टीमें बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जाकर सर्वे तकनीक का अध्ययन कर चुकी हैं और डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। अदालत ने कहा था कि भूमि सर्वेक्षण समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि झारखंड में भूमि सर्वे की प्रक्रिया वर्ष 1975 से चल रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि सरकार ने अदालत को बताया कि लातेहार और लोहरदगा जैसे कुछ जिलों में सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य जिलों में कार्य प्रगति पर है।

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